जम्मू कश्मीर में कड़ी सुरक्षा के बीच शहरी निकाय चुनाव के लिए मतदान शुरु
जम्मू कश्मीर में शहरी निकाय चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान सोमवार सुबह से शुरु हो गया हैं।
जम्मू कश्मीर में शहरी निकाय चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान सोमवार सुबह से शुरु हो गया हैं। सूत्रों के मुताबिक मतदान सुबह सात बजे से शुरु होकर शाम चार बजे तक होगा। प्रशासन द्रवरा 4.42 लाख लोगों के वोट डालने की संभावना है। जम्मू कश्मीर में भाजपा और पीडीपी की सरकार गिरने के बाद यह पहली बार है जब जम्मू कश्मीर में लोग चुनाव में हिस्सा ले रहे है।
आतंकियों की धमकी के बीच लोगों का मतदान
इससे पहले आतंकियों नें लोगों को मतदान न करने की धमकी दी है। आतंकियों नें गांव के लोगों से अपील की है की अगर वे घर से बाहर निकल कर मतदान करने के लिए जाएंगे तो उन्हें आतंकियों का सामना करना पडेगा। लेकिन स्थानीयों लोगों नें आतंकियों की धमकी को नज़रअंदाज कर घर से बाहर निकल कर वोट डाल रहे है। इससे साफ़ जाहिर हो गया है की लोगों में अब आतंकियों की धमकी का कोई असर नहीं हो रहा है।
सेना नें कर रखी है कड़ी सुरक्षा
मदतान के लिए सेना नें सुरक्षा को सख़्त किया हुआ है। सुरक्षा इतनी कड़ी है की लोगों को मतदान केंद्र तक आने में भारी सुरक्षा प्रकरणों से गुजरना पड़ रहा है।
मोबाइल इंटरनेट सेवाएं सस्पेंड
शहरी निकाय चुनाव की सुरक्षा के लिए घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को संस्पेंड किया हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों को लगता है की सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की अप्रिय घटना का असर चुनाव पर पड़ सकता है।
आतंकियों की धमकी के बीच लोगों का मतदान
इससे पहले आतंकियों नें लोगों को मतदान न करने की धमकी दी है। आतंकियों नें गांव के लोगों से अपील की है की अगर वे घर से बाहर निकल कर मतदान करने के लिए जाएंगे तो उन्हें आतंकियों का सामना करना पडेगा। लेकिन स्थानीयों लोगों नें आतंकियों की धमकी को नज़रअंदाज कर घर से बाहर निकल कर वोट डाल रहे है। इससे साफ़ जाहिर हो गया है की लोगों में अब आतंकियों की धमकी का कोई असर नहीं हो रहा है।
सेना नें कर रखी है कड़ी सुरक्षा
मदतान के लिए सेना नें सुरक्षा को सख़्त किया हुआ है। सुरक्षा इतनी कड़ी है की लोगों को मतदान केंद्र तक आने में भारी सुरक्षा प्रकरणों से गुजरना पड़ रहा है।
मोबाइल इंटरनेट सेवाएं सस्पेंड
शहरी निकाय चुनाव की सुरक्षा के लिए घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को संस्पेंड किया हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों को लगता है की सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की अप्रिय घटना का असर चुनाव पर पड़ सकता है।
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