रविवार, 2 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री को पत्र लिख पारदर्शिता और पर्यावरणीय चिंताओं पर उठाए सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने रक्षा मंत्री…

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री को पत्र लिख पारदर्शिता और पर्यावरणीय चिंताओं पर उठाए सवाल
(फोटो: IANS)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र लिखकर परियोजना की पारदर्शिता, पर्यावरणीय प्रभाव और इसके 'रणनीतिक' होने के दावों पर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। रमेश ने कहा कि रक्षा मंत्री द्वारा उनके पिछले पत्रों का जवाब दिए जाने के बावजूद कई महत्वपूर्ण प्रश्न अनुत्तरित हैं।

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रमेश ने इस परियोजना के स्वरूप को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने तर्क दिया है कि इसे एक 'रणनीतिक परियोजना' बताना अतिशयोक्ति है, क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक प्रतीत होता है। उन्होंने पत्र में लिखा कि परियोजना का सबसे बड़ा हिस्सा 'गैलाथिया बे' में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है, जिस पर कुल बजट का लगभग आधा हिस्सा खर्च होना है। इस बंदरगाह के लिए वित्त मंत्रालय की एक समिति की बैठकों में वायबिलिटी गैप फंडिंग को मंजूरी दी गई है, जो इसके व्यावसायिक चरित्र को स्पष्ट करता है।

व्यावसायिक बनाम रणनीतिक महत्व

जयराम रमेश ने बताया कि परियोजना का एकमात्र रक्षा-संबंधी घटक एक दोहरे उपयोग वाला हवाई अड्डा है। इसके लिए कुल 166 वर्ग किलोमीटर भूमि का मात्र 5% हिस्सा और कुल बजट का करीब 10% ही आवंटित किया गया है। उन्होंने 'ग्रेट निकोबार डेवलपमेंट एरिया मास्टर प्लान-2047' का हवाला देते हुए कहा कि इसमें क्रूज टर्मिनल, कैसीनो, थीम पार्क, वाटर पार्क और एक वित्तीय केंद्र बनाने की योजना है, जो इसे एक रणनीतिक परियोजना के बजाय एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट जैसा दिखाता है।

पर्यावरणीय और पारिस्थितिक चिंताएं

कांग्रेस महासचिव ने अपने 16 मई के पत्र में उठाई गई सात प्रमुख पर्यावरणीय चिंताओं को फिर से दोहराया, जिनका अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। इनमें दो वनाच्छादित पहाड़ियों की कटाई, शोम्पेन जनजाति के संरक्षित क्षेत्र को नुकसान, समुद्री जीवन पर प्रभाव और पूर्व सैनिकों का तीसरी बार विस्थापन जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भूकंप और सुनामी जैसे प्राकृतिक खतरों का भी सही आकलन नहीं किया गया है।

रमेश ने परियोजना को मिली राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की मंजूरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस उच्च-शक्ति समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह मंजूरी दी गई, उसे आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जो सरकार के पारदर्शिता के दावों को कमजोर करता है। उन्होंने रक्षा मंत्री से आग्रह किया कि वे भारतीय नौसेना के उन सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों से भी परामर्श करें, जिन्होंने इस परियोजना के रणनीतिक औचित्य पर संदेह व्यक्त किया है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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