सोमवार, 28 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दावा: 'हमारा पूर्ण नियंत्रण', अमेरिका के साथ तनाव बरकरार

ईरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने पूर्ण नियंत्रण का दावा करते हुए कहा है कि किसी भी देश की टिप्पणी से इसकी स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह बयान…

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दावा: 'हमारा पूर्ण नियंत्रण', अमेरिका के साथ तनाव बरकरार
(फोटो: IANS)

ईरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने पूर्ण नियंत्रण का दावा करते हुए कहा है कि किसी भी देश की टिप्पणी से इसकी स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव चरम पर है। ईरानी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल हबीबोल्लाह सय्यारी ने कहा कि "दुश्मन की बयानबाजी" के बावजूद यह जलमार्ग ईरान के अधिकार क्षेत्र में है।

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हबीबोल्लाह सय्यारी ने ईरानी नौसेना की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा, "हम ओमान सागर के उत्तरी हिस्से और होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में निर्णायक कार्रवाई करते हैं और किसी को भी वहां से गुजरने की अनुमति नहीं देते।" उन्होंने बताया कि होर्मुज के पश्चिमी हिस्से और फारस की खाड़ी की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना के पास है, जबकि जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से और उत्तरी हिंद महासागर का नियंत्रण ईरानी नौसेना करती है।

कूटनीतिक तनाव और बातचीत की संभावना

यह सैन्य बयानबाजी ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे कूटनीतिक गतिरोध का हिस्सा है। ईरान ने पहले प्रस्ताव दिया था कि यदि अमेरिका सैन्य दबाव कम करे और उसके बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटा ले, तो वह सात दिनों के भीतर इस रास्ते को फिर से खोल देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। हालांकि, ट्रंप ने भविष्य में दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना जताई है। इसके विपरीत, ईरान के सरकारी मीडिया आईआरएनए ने सोमवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क गए ईरानी प्रतिनिधिमंडल की अमेरिका के साथ किसी नई बातचीत की कोई योजना नहीं है।

वैश्विक व्यापार पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में जारी तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल की कीमतों और क्षेत्रीय व्यापार पर पड़ रहा है। 28 सितंबर को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी। हालांकि, इस तनाव के बीच क्षेत्र से होने वाले तेल निर्यात में हाल के महीनों की तुलना में कुछ सुधार भी दर्ज किया गया है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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