खाड़ी देशों की 'लाइफ़लाइन' हैं विलवणीकरण संयंत्र, जानें क्यों इन पर हमला पूरे क्षेत्र के लिए ख़तरा है
खाड़ी के देश दशकों से पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं और अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए समुद्री जल को पीने योग्य बनाने वाली तकनीक पर निर्भर हैं। ऐसे में जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है और…
खाड़ी के देश दशकों से पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं और अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए समुद्री जल को पीने योग्य बनाने वाली तकनीक पर निर्भर हैं। ऐसे में जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है और पानी के इन संयंत्रों को निशाना बनाया जाता है, तो लाखों लोगों के जीवन पर संकट गहराने की आशंका पैदा हो जाती है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में अमेरिकी हमले में ईरान का एक विलवणीकरण (डिसैलिनेशन) प्लांट तबाह हो गया, जिसके बाद ईरान ने भी कुवैत के ऐसे ही एक संयंत्र पर जवाबी हमला किया।
यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया के बेहद संवेदनशील हालात को और गंभीर बनाता है, जहाँ संघर्ष विराम की उम्मीदें लगातार कम हो रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने लगातार आठ रातों तक ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिनमें एक बोंजी विलवणीकरण संयंत्र भी शामिल था। ईरान ने कहा कि इस हमले से 20 गाँवों के लगभग 10,000 लोगों की पेयजल आपूर्ति बाधित हो जाएगी। इसके जवाब में ईरान ने अगले ही दिन कुवैत के एक जल संयंत्र को निशाना बनाया, जिसे कुवैत ने अपने लिए 'जीवन पर खतरा' बताया है।
खाड़ी देशों की पानी पर निर्भरता
विलवणीकरण संयंत्र वे प्लांट होते हैं जो समुद्र के खारे पानी को साफ करके उसे पीने लायक बनाते हैं। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के छह सदस्य देश अपनी पानी की ज़रूरतों के लिए इन पर बहुत अधिक निर्भर हैं। वास्तव में, दुनिया की लगभग 60% विलवणीकरण क्षमता इन्हीं देशों के पास है और ये वैश्विक स्तर पर उत्पादित कुल शुद्ध जल का करीब 40% हिस्सा तैयार करते हैं।
आंकड़े इस निर्भरता को और स्पष्ट करते हैं:
- कुवैत: पीने के पानी का लगभग 90% हिस्सा विलवणीकरण संयंत्रों से आता है।
- ओमान: यह आंकड़ा करीब 86% है।
- सऊदी अरब: 70% पानी इन्हीं संयंत्रों से मिलता है और यह दुनिया में सबसे ज़्यादा अलवणीकृत पानी का उत्पादन करता है।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): करीब 42% ज़रूरतें इन प्लांट से पूरी होती हैं।
क्यों अहम हैं ये प्लांट?
गल्फ रिसर्च सेंटर की 2020 की एक रिपोर्ट बताती है कि इस क्षेत्र के लगभग 90% जल संसाधनों की पूर्ति भूजल और विलवणीकृत पानी से होती है। जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है, जिससे इन ऊर्जा-खपत वाले समुद्री जल संयंत्रों पर निर्भरता और बढ़ गई है। संयुक्त अरब अमीरात से लेकर कुवैत तक, खाड़ी के तटों पर 400 से अधिक ऐसे संयंत्र लगे हैं। ईरान भी इन संयंत्रों का उपयोग करता है, लेकिन कई नदियों और बांधों के होने के कारण वह खाड़ी के अन्य देशों की तरह इन पर पूरी तरह निर्भर नहीं है।
इनपुट: IANS



