बुधवार, 9 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों का मामला, मेटा इंडिया प्रमुख को NCPCR का समन

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों के गंभीर आरोपों के बाद, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मेटा इंडिया के प्रबंध…

इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों का मामला, मेटा इंडिया प्रमुख को NCPCR का समन
(फोटो: IANS)

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों के गंभीर आरोपों के बाद, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मेटा इंडिया के प्रबंध निदेशक और प्रमुख को तलब किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें 9 सितंबर को आयोग के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया है।

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यह पूरा मामला बीबीसी आई की एक खोजी रिपोर्ट के बाद सामने आया था, जिसमें दावा किया गया था कि इंस्टाग्राम भारत में पेड विज्ञापनों के जरिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा दे रहा है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि इन विज्ञापनों में 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि और जांच

NCPCR ने बीबीसी की मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए 3 जुलाई, 2026 को मेटा को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। मेटा ने नोटिस मिलने के एक सप्ताह बाद अपना जवाब दाखिल किया, लेकिन आयोग उस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। जवाब की समीक्षा के बाद, NCPCR ने मामले की पूरी सच्चाई और तथ्यों का पता लगाने के लिए एक औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया। इसी जांच प्रक्रिया के तहत अब मेटा इंडिया के शीर्ष अधिकारी को समन भेजा गया है।

क्या थे रिपोर्ट के आरोप?

बीबीसी की जांच में बताया गया था कि ये विज्ञापन यूजर्स को मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम के चैनलों पर ले जाते थे, जहां कथित तौर पर ऐसी सामग्री सिर्फ 99 रुपए में बेची जा रही थी। रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया था कि इंस्टाग्राम पर कोई भी विज्ञापन तभी प्रकाशित होता है, जब उसे प्लेटफॉर्म की मॉडरेशन तकनीक से मंजूरी मिल जाती है। हैरानी की बात यह है कि जब बीबीसी ने एक ऐसे विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की, तो प्लेटफॉर्म ने कथित तौर पर जवाब दिया कि वह पोस्ट उनकी 'कम्युनिटी गाइडलाइंस' का उल्लंघन नहीं करता है।

NHRC भी कर रहा है जांच

इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी सक्रिय है। NHRC ने दिल्ली पुलिस को इन आरोपों की गहन जांच करने का निर्देश दिया है। पुलिस को यह भी पता लगाने के लिए कहा गया है कि क्या मेटा और संबंधित संस्थाओं ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के तहत अपनी अनिवार्य रिपोर्टिंग जिम्मेदारियों का पालन किया है या नहीं।

इनपुट: IANS

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