IIT मद्रास का डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए ₹1,000 करोड़ का फंड, पूर्व छात्रों ने भी किया निवेश
भारत में उभर रहे डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) ने एक बड़ी पहल की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, संस्थान ने IIT मद्रास रिसर्च पार्क और…
भारत में उभर रहे डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) ने एक बड़ी पहल की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, संस्थान ने IIT मद्रास रिसर्च पार्क और यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स के साथ मिलकर 'आईआईटी मद्रास यूनिकॉर्न फ्रंटियर फंड' लॉन्च किया है। इस फंड का लक्ष्य 600 करोड़ से लेकर 1,000 करोड़ रुपये तक की पूंजी जुटाना है, ताकि नई और जटिल टेक्नोलॉजी पर काम कर रही कंपनियों को शुरुआती दौर में वित्तीय और तकनीकी मदद दी जा सके।
यह घोषणा बेंगलुरु में 26 सितंबर को आयोजित IIT मद्रास एलुमनाई एसोसिएशन के सातवें वार्षिक सम्मेलन 'संगम 2026' के मौके पर की गई। इस साल के सम्मेलन की थीम 'आत्मनिर्भर भारत' रखी गई थी। IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत 2047' के सपने में भारत एक स्टार्टअप राष्ट्र होगा और यह वेंचर कैपिटल फंड उभरते स्टार्टअप्स को बड़ी कंपनियों में बदलने में मदद करने की दिशा में एक अहम प्रयास है।
फंड का मकसद और कार्यप्रणाली
डीप-टेक स्टार्टअप्स को पारंपरिक स्टार्टअप्स की तुलना में अपनी टेक्नोलॉजी विकसित करने और उसे बाजार तक लाने में ज़्यादा समय लगता है। यह नया फंड इसी लंबे विकास चक्र के दौरान कंपनियों को ज़रूरी पूंजी और सहयोग देगा। इस तरह की पूंजी को 'पेशेंट कैपिटल' भी कहा जाता है, जिसमें निवेशक तकनीक को परिपक्व होने के लिए पर्याप्त समय देते हैं। फंड की कुल राशि का लगभग 60% हिस्सा शुरुआती पोर्टफोलियो बनाने में इस्तेमाल होगा, जबकि बाकी 40% राशि आगे के निवेश दौर के लिए रखी जाएगी।
फंड का मुख्य फोकस इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) आधारित और इंजीनियरिंग पर केंद्रित डीप-टेक कंपनियों पर होगा। इनमें रोबोटिक्स, स्पेस टेक्नोलॉजी, डिफेंस टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं।
पूर्व छात्रों का मिला बड़ा सहयोग
इस पहल की खास बात यह है कि इसमें IIT मद्रास के पूर्व छात्रों ने गहरी दिलचस्पी दिखाई है। अब तक फंड में 150 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश पूर्व छात्रों की ओर से किया जा चुका है। IIT मद्रास के डीन (एलुमनाई और कॉर्पोरेट संबंध) प्रोफेसर अश्विन महालिंगम ने इस पर जोर देते हुए कहा कि यह वीसी फंड पूर्व छात्रों को संस्थान के इनोवेशन इकोसिस्टम में निवेश करने का एक बेहतरीन अवसर देता है।
क्या है आगे की योजना?
IIT मद्रास रिसर्च पार्क एंड इनक्यूबेशन सेल के ग्रुप सीईओ नटराजन मालुपिल्लई के मुताबिक, इस फंड से 24 से 30 ऐसी कंपनियों को मदद देने का लक्ष्य है, जो भारत की आर्थिक वृद्धि में योगदान देने के साथ-साथ वैश्विक पहचान बना सकें। फंड का बड़ा हिस्सा IIT मद्रास इकोसिस्टम से निकली कंपनियों में लगाया जाएगा, लेकिन देश के अन्य हिस्सों के সম্ভাবনাময় डीप-टेक स्टार्टअप्स पर भी विचार किया जाएगा। इस पहल का अंतिम लक्ष्य सिर्फ स्टार्टअप्स में निवेश करना नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता को मजबूत करना और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना भी है।
इनपुट: IANS



