सोमवार, 13 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
शिक्षा

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर IIT मद्रास की बड़ी पहल, देश का पहला ISO सर्टिफाइड वेलनेस सेंटर बना

छात्रों के बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ने एक मिसाल कायम की है। यह देश का पहला ऐसा केंद्रीय वित्तपोषित तकनीकी संस्थान बन गया है, जिसके वेलनेस सेंटर को अंतर

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर IIT मद्रास की बड़ी पहल, देश का पहला ISO सर्टिफाइड वेलनेस सेंटर बना
(फोटो: IANS)

छात्रों के बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ने एक मिसाल कायम की है। यह देश का पहला ऐसा केंद्रीय वित्तपोषित तकनीकी संस्थान बन गया है, जिसके वेलनेस सेंटर को अंतरराष्ट्रीय ISO 45001:2018 सर्टिफिकेट मिला है। यह सम्मान संस्थान द्वारा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के लिए बनाए गए एक सुरक्षित और स्वस्थ माहौल को प्रमाणित करता है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह प्रमाणन व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रबंधन के अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए टीयूवी नॉर्ड समूह द्वारा प्रदान किया जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि IIT मद्रास ने छात्रों और कर्मचारियों के लिए एक सहयोगी परिसर विकसित करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।

सिर्फ़ परामर्श नहीं, एक समग्र व्यवस्था

IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि ने बताया कि संस्थान ने छात्र कल्याण को एक रणनीतिक प्राथमिकता दी है, जिसके लिए 'एसोसिएट डीन (वेलनेस)' का एक विशेष पद भी बनाया गया है। उन्होंने कहा, "शैक्षणिक सफलता तभी सार्थक है जब छात्र भावनात्मक रूप से भी मजबूत हों।" संस्थान की व्यवस्था केवल परामर्श सेवाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें छात्र मार्गदर्शन, सहपाठी सहायता समूह, तनाव की शुरुआती पहचान और समय पर हस्तक्षेप जैसे कई कार्यक्रम शामिल हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण और कार्यशाला

यह पहल सिर्फ IIT मद्रास तक सीमित नहीं है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव (उच्च शिक्षा) रीना सोनवाल कौली के मुताबिक, जनवरी 2024 से मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत छात्र कल्याण पर विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे अब तक 3,000 से ज्यादा शिक्षक जुड़ चुके हैं। इसी कड़ी में, संस्थान ने 12 और 13 जुलाई को ‘सेलिब्रेटिंग माइंड्स: अकादमिक उत्कृष्टता से सतत कल्याण तक’ विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला भी आयोजित की। इसमें दक्षिण भारत के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के 200 से अधिक शिक्षकों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

क्या हुए कार्यशाला में फैसले?

दो दिनों तक चली इस कार्यशाला में तनावमुक्त शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, नशा रोकथाम और संस्थागत सहायता जैसे कई अहम विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के अंत में, विभिन्न संस्थानों ने छात्र मार्गदर्शन, परामर्श सेवाओं और सहपाठी सहयोग तंत्र को मजबूत बनाने के लिए कई सिफारिशें तैयार कीं। शिक्षा मंत्रालय इन सुझावों का इस्तेमाल देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र कल्याण की बेहतर नीतियां बनाने के लिए करेगा।

इनपुट: IANS

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