बुधवार, 1 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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कैसे Generics और Branded दवाइयाँ एक दूसरे से विभिन्न है?

भारत जैसे देश में दवाइयों की बिक्री, लेने देने में काफी घोटाले हुए है।

कैसे Generics और Branded दवाइयाँ एक दूसरे से विभिन्न है?

भारत जैसे देश में दवाइयों की बिक्री, लेने देने में काफी घोटाले हुए है। बहुत सी ऐसे महंगी दवाई है , जिसको गरीब लोग खरीद नहीं सकते और वो उत्तम इलाज से वंचित रह जाते है। इसलिए उन्हें जेनेरिक दवाई की तरफ रुख करना पड़ता है। काफी वक़्त पहले यह खबर जोरों पर थी की सरकार ने डॉक्टरों को जेनेरिक दवाएं मरीजों को prescribe करने की सलाह दी ताकि गरीबों तक भी बेस्ट दवाएं कम दाम में उपलब्ध हो सकें। लेकिन इसका विरोध करते हुए डॉक्टर्स ने यह कहा जेनेरिक दवाएं लिखने से अगर किसी मरीज को दिक्कत हुई या उसकी तबीयत बिगड़ गई तो डॉक्टर्स उसके हमारी जिम्मेदारी नहीं होंगे।

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क्या आप जानते है Generics और Branded दवाइयाँ एक दूसरे से कैसे विभिन्न है? आप को विस्तार से बताना चाहेंगे आखिर Generics और Branded दवाइयाँ में क्या अंतर है।
Generics : अगर कोई कंपनी किसी भी दवा को विकसित करती है उसके पास उस दवा का पेटेंट होता है और पेटेंट एक सीमित अवधि के लिए होती है। जैसे ही पेटेंट की अवधि एक बार खत्म हो जाए तो उसके बाद कोई भी कंपनी उस दवा का निर्माण और मार्केटिंग कर सकती है। इसके लिए उन्‍हें सबसे पहले उस दवा को बनाने वाली कंपनी से इजाजत लेने की जरुरत नहीं होती।

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साथ ही आपको यह भी बताना चाहेंगे की किसी एक बीमारी के इलाज के लिए तमाम तरह की रिसर्च और स्टडी के प्रश्चात एक रसायन (साल्ट) तैयार किया जाता है जिसे आसानी से उपलब्ध करवाने के लिए दवा की शक्ल दे दी जाती है। इस साल्ट को हर कंपनी अलग-अलग नामों से बेचती है। कोई इसे महंगे दामों में बेचती है तो कोई सस्ते दर पर लोगों को उपलब्ध करवाती है। लेकिन इस साल्ट का जेनेरिक नाम साल्ट के कंपोजिशन और बीमारी का ध्यान रखते हुए एक विशेष समिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। पूरी दिनिया में किसी भी साल्ट का जेनेरिक नाम एक ही रहता है। इसके साथ ही आपको यह भी बताना चाहेंगे की कंपनी को यह ध्यान रखना होता है की जेनेरिक दवा का असर मूल दवा जैसा ही हो।

Branded: ब्रांडेड दवा से तातपर्य यह है कि बड़ी फार्मा कंपनी जिसके पास किसी दवा को बनाने का लाइसेंस होता है। यह बड़ी कम्पनियों द्वारा बनाई जाती है और उन्हें के द्वारा मार्केटिंग भी की जाती है। आपको यह भी बताना चाहेंगे की ब्रांडेड दवा ज्यादा महंगी होती है। इन दवा को एक ब्रांड के नाम के साथ बेचा जाता है। इसलिए इनका प्राइस रेट भी काफी ज्यादा होता है। जिसे हर लोग खरीद नहीं सकते है।

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Sadhna Sharma

साधना शर्मा News4Social की संवाददाता हैं। वे राष्ट्रीय खबरों और रोज़मर्रा के ताज़ा घटनाक्रम को कवर करती हैं, और मुद्दों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुँचाने पर ध्यान देती हैं। सभी लेख देखें →

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