मंगलवार, 29 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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एस. जयशंकर: दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर, देश बदल रहे अपनी रणनीति

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि दुनिया एक बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहाँ अमेरिका और चीन जैसे शक्तिशाली देशों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण अन्य देश अपने लिए नए रास्ते और साझेदारियाँ…

एस. जयशंकर: दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर, देश बदल रहे अपनी रणनीति
(फोटो: IANS)

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि दुनिया एक बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहाँ अमेरिका और चीन जैसे शक्तिशाली देशों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण अन्य देश अपने लिए नए रास्ते और साझेदारियाँ तलाश रहे हैं। न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सभी सरकारें अपने जोखिम को कम करने और संबंधों में विविधता लाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जयशंकर ने कहा कि पुराने गठबंधन कमजोर हो रहे हैं और सबसे शक्तिशाली देश भी अकेले फैसले लेने की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने इसे एक ऐसे दौर के रूप में वर्णित किया जहाँ देश एक अधिक प्रतिस्पर्धी अंतरराष्ट्रीय माहौल के हिसाब से खुद को ढाल रहे हैं। विदेश मंत्री ने कहा, "बाकी की दुनिया अपने इंतजाम करने में व्यस्त है।"

बदलती वैश्विक कूटनीति

जयशंकर ने आज की कूटनीति को एक "बहुत जोखिम भरा खेल" बताया, जिसमें सरकारों को एक तरफ तत्काल फैसले लेने होते हैं तो दूसरी तरफ लंबी बातचीत के लिए धैर्य भी रखना पड़ता है। उन्होंने इस विरोधाभास का भी जिक्र किया कि जहाँ देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, वहीं गहरी आर्थिक निर्भरता भी कायम है। उनके मुताबिक, जब कोई देश इस निर्भरता का लाभ उठा लेता है, तो उसे दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल करने का प्रलोभन भी बढ़ जाता है।

उन्होंने व्यापार, वित्त और बाज़ार तक पहुँच जैसे 'चोक पॉइंट्स' का उदाहरण दिया, जिनके ज़रिए देश एक-दूसरे पर दबाव बना सकते हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि व्यापार व्यवस्था की बुनियाद वाली कई पुरानी मान्यताएँ समय के साथ कमजोर हुई हैं, क्योंकि बहुत सी प्रथाएँ बाज़ार के सिद्धांतों से मेल नहीं खाती थीं।

अमेरिका की नई नीतियां और भारत का संतुलन

विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका अब व्यापार को लेकर एक अलग रास्ता अपना रहा है और अलग-अलग साझेदारों के साथ व्यक्तिगत डील कर रहा है। उन्होंने इस धारणा को खारिज कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नियमों के कमजोर होने के लिए केवल अमेरिका जिम्मेदार है। उनके अनुसार, बाज़ार से जुड़ी मान्यताएँ पहले से ही कमजोर हो चुकी थीं।

भारत की रणनीति पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत अमेरिका, यूरोप, जापान, चीन, रूस, खाड़ी देशों, आसियान और ग्लोबल साउथ के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाकर चलेगा। उन्होंने इस दृष्टिकोण की तुलना 'पोर्टफोलियो मैनेजमेंट' से की। अंत में, उन्होंने विश्वास जताया कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर से गुजरते हुए देश नए समझौते करेंगे और वे दुनिया को लेकर निराशावादी नहीं हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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