चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कपिल सिब्बल ने उठाए गंभीर सवाल, पूछा- फैसले किसके थे?
वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना फैसले लिए गए…
वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना फैसले लिए गए, तो क्या उन्हें आयोग का सामूहिक निर्णय माना जा सकता है या वे केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के व्यक्तिगत फैसले थे।
समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में सिब्बल ने दो चुनाव आयुक्तों के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि पिछले दस महीनों से उनके बीच कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने इस अवधि के दौरान हुए कई चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर दो आयुक्तों को फैसलों की जानकारी ही नहीं थी, तो यह एक बेहद गंभीर मामला है। सिब्बल ने यह भी बताया कि इस संबंध में जारी हुए प्रेस नोट का अब तक कोई खंडन नहीं किया गया है।
फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल
कपिल सिब्बल ने सवाल किया कि अगर बैठकों के लिए कोई एजेंडा ही नहीं था और कार्यवाही का कोई रिकॉर्ड (मिनट्स) भी नहीं रखा गया, तो बाकी दो आयुक्तों को यह कैसे पता चलता कि क्या फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्ति यही थी कि उनकी सलाह के बिना फैसले लिए जा रहे थे। यदि ऐसा हुआ है तो यह गंभीर विषय है और सुप्रीम कोर्ट को भी इस पर संज्ञान लेना चाहिए।"
बहुमत और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
यह पूछे जाने पर कि क्या चार राज्यों में लिए गए फैसलों को वापस लिया जा सकता है, सिब्बल ने अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ा। हालांकि, उन्होंने अपनी राय रखते हुए कहा कि चुनाव आयोग या तो सर्वसम्मति से या बहुमत से निर्णय लेता है। सिब्बल के अनुसार, "यदि चुनाव आयोग में निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं और बहुमत ही किसी फैसले के खिलाफ है, तो यह सवाल उठता है कि वह निर्णय चुनाव आयोग का निर्णय कैसे माना जा सकता है।" उन्होंने कहा कि अब यह अदालत को तय करना है कि वह इन फैसलों और उनकी प्रक्रिया को किस नजरिए से देखती है।
इनपुट: IANS



