मंगलवार, 28 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

'वंदे मातरम' पर वारिस पठान के बयान से राजनीतिक बहस तेज़, NDA ने जताया कड़ा ऐतराज़

AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान द्वारा 'वंदे मातरम' को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव पर की गई टिप्पणी ने एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सत्तारूढ़ NDA के…

'वंदे मातरम' पर वारिस पठान के बयान से राजनीतिक बहस तेज़, NDA ने जताया कड़ा ऐतराज़
(फोटो: IANS)

AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान द्वारा 'वंदे मातरम' को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव पर की गई टिप्पणी ने एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सत्तारूढ़ NDA के नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और राष्ट्रगीत के सम्मान को हर नागरिक का कर्तव्य बताया है। पठान ने कहा था कि मुसलमान राष्ट्रगीत का सम्मान करते हैं, लेकिन इसके कुछ हिस्से इस्लामी मान्यताओं के विरुद्ध होने के कारण वे इसे गा नहीं सकते।

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इस बयान के जवाब में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा, "अगर आप भारत में रहना चाहते हैं, तो आपको 'वंदे मातरम' कहना होगा वरना वे किसी दूसरे देश में जाकर रह सकते हैं।" वहीं, राज्य के एक अन्य कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने इस मुद्दे पर कानून बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान इस तरह के कानून की ज़रूरत को और पुख्ता करते हैं और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े 'वंदे मातरम' का अनादर किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

विभिन्न दलों की सधी हुई प्रतिक्रिया

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने भी वारिस पठान की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे देशहित के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा, "राष्ट्रगीत का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है... ऐसी टिप्पणियां समाज में मनमुटाव का माहौल बनाती हैं, जो सही नहीं है।"

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोई भी टिप्पणी करने से पहले वारिस पठान के बयान का पूरा संदर्भ और उसके पीछे की चिंताओं को समझना ज़रूरी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश संविधान निर्माताओं द्वारा तय किए गए सिद्धांतों का पालन करता रहा है।

कांग्रेस ने संविधान को केंद्र में रखने की बात कही

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि 'वंदे मातरम' का सम्मान विवाद का विषय नहीं होना चाहिए और इसे बोलने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने कुछ सवाल भी उठाए। दलवई ने कहा, "अगर 'वंदे मातरम' पर जोर दिया जा रहा है, तो 'जन गण मन' पर भी ध्यान क्यों नहीं दिया जाता? कुछ दफ्तरों में राष्ट्रीय ध्वज क्यों नहीं लगाए जाते? अशोक चक्र पर आपत्ति क्यों जताई जाती है?" उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि लोगों की सोच के केंद्र में संविधान होना चाहिए।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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