कांगो में इबोला का कहर जारी: WHO की रिपोर्ट में 520 से ज़्यादा मौतों की पुष्टि, क्षेत्रीय जोखिम बढ़ा
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है, जहाँ इस बीमारी से मरने वालों की पुष्टि संख्या 520 के पार पहुँच गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक हालिया रिपो
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है, जहाँ इस बीमारी से मरने वालों की पुष्टि संख्या 520 के पार पहुँच गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक हालिया रिपोर्ट ने इस संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया है कि संक्रमण देश के पूर्वी हॉटस्पॉट इलाकों में लगातार फैल रहा है, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर भी जोखिम बना हुआ है।
समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट के अनुसार, 5 जुलाई तक डीआरसी में इबोला के 1,624 पुष्ट मामले सामने आए, जिनमें 521 मौतें शामिल हैं। इन आँकड़ों के आधार पर मृत्यु दर बढ़कर 32.1 प्रतिशत हो गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर संक्रमण का भारी दबाव है और निगरानी प्रणाली अभी भी प्रकोप की रफ़्तार से पीछे चल रही है।
प्रकोप के बढ़ने के मुख्य कारण
रिपोर्ट में डीआरसी में प्रकोप के लगातार बढ़ने के कई कारण बताए गए हैं। इनमें पूर्वी प्रांतों इतुरी और नॉर्थ किवु के स्वास्थ्य क्षेत्रों में लगातार संक्रमण का फैलना, समुदाय के भीतर होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या और नए इलाकों में बीमारी का पहुँचना शामिल है। एक चिंताजनक तथ्य यह है कि इलाज के लिए अस्पताल पहुँचने से पहले ही बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। 5 जुलाई तक जाँची गईं 430 पुष्ट मौतों में से 397 (92.3%) मौतें या तो समुदाय में हुईं या इलाज केंद्र में भर्ती होने से पहले।
निगरानी और इलाज की चुनौतियाँ
भले ही कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन यह अभी भी संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक स्तर तक नहीं पहुँच पाया है। 5 जुलाई तक, 12,412 संपर्कों की निगरानी की जा रही थी, लेकिन केवल 32.4% पुष्ट मामलों का ही पता कॉन्टैक्ट फॉलो-अप के ज़रिए चल पाया। इससे यह संकेत मिलता है कि कई संक्रमण ज्ञात कॉन्टैक्ट लिस्ट के बाहर हो रहे हैं। इलाज की सुविधाओं पर भी भारी बोझ है। देश के 22 से अधिक उपचार केंद्रों में लगभग 700 बिस्तर हैं, जिनकी 94.2% क्षमता भरी हुई थी।
एक नई उम्मीद: क्लीनिकल ट्रायल
इस संकट के बीच, WHO के सहयोग से 2 जुलाई को डीआरसी में एक महत्वपूर्ण क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया गया है। यह पहला ऐसा परीक्षण है जो विशेष रूप से इबोला के बुंडिबुग्यो वायरस के इलाज का मूल्यांकन कर रहा है, जिसके लिए अभी तक कोई मान्यता प्राप्त वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। इस ट्रायल में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी एमबीपी134 और रेमडेसिविर दवा के असर का अध्ययन किया जा रहा है।
पड़ोसी देशों और फ्रांस की स्थिति
पड़ोसी देश युगांडा में पिछले दो हफ़्तों में कोई नया मामला सामने नहीं आया है। वहाँ दर्ज 20 पुष्ट मामलों में से 16 मरीज़ ठीक हो चुके हैं। वहीं, फ्रांस में मिले एक मरीज़ को भी ठीक होने के बाद 4 जुलाई को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। रिपोर्ट ने डीआरसी में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम को 'बहुत ज़्यादा' बताया है और चेतावनी दी है कि लोगों की आवाजाही के कारण युगांडा जैसे पड़ोसी देशों में संक्रमण फैलने का ख़तरा बना हुआ है।
इनपुट: IANS



