शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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ईरान की ब्रिटेन को चेतावनी: अमेरिकी सैन्य अभियानों में साथ देने से बचें

ईरान ने ब्रिटेन को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वह ईरान पर हमले के लिए अमेरिका को किसी भी तरह की सैन्य मदद न दे। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची…

ईरान की ब्रिटेन को चेतावनी: अमेरिकी सैन्य अभियानों में साथ देने से बचें
(फोटो: IANS)

ईरान ने ब्रिटेन को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वह ईरान पर हमले के लिए अमेरिका को किसी भी तरह की सैन्य मदद न दे। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ब्रिटिश विदेश सचिव एड मिलिबैंड से फोन पर हुई बातचीत में यह संदेश दिया।

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अराघची ने कहा कि “आक्रामक देशों” के साथ किसी भी तरह का सहयोग, भले ही वह मौजूदा रक्षा समझौतों के तहत हो, ईरान के लिए “स्वीकार्य नहीं” होगा। उन्होंने ब्रिटेन की हालिया नीतियों को “अनुचित और गलत” बताते हुए लंदन से अपने रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

लंदन की नीतियों पर तेहरान की आपत्ति

ईरानी विदेश मंत्री ने विशेष रूप से दो मुद्दों पर नाराजगी जताई। पहला, लंदन द्वारा ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताना। दूसरा, हाल के महीनों में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए संघर्षों में ब्रिटेन की “मिलीभगत” का आरोप।

अराघची ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई देश अपनी ज़मीन और सुविधाओं का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ अवैध हमले के लिए करने देता है, तो यह आक्रामकता मानी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में पीड़ित देश को आत्मरक्षा का अधिकार मिल जाता है।

कूटनीति और क्षेत्रीय तनाव

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अराघची ने कहा कि ईरान ने जून में अमेरिका के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन वाशिंगटन अपने वादे पूरे करने में नाकाम रहा। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर ओमान के साथ एक व्यवस्था बना रहा है और चेतावनी दी कि किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से हालात और बिगड़ेंगे।

इस बातचीत में ब्रिटिश विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने स्पष्ट किया कि उनका देश ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल नहीं है और वे विवादों को सुलझाने के लिए कूटनीति को ही एकमात्र रास्ता मानते हैं। हालांकि, पिछले महीने ही ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ईरान से जुड़े अभियानों के लिए अमेरिकी सेना को अपने सैन्य ठिकानों का उपयोग जारी रखने की अनुमति दी थी।

हालिया सैन्य टकराव

यह तनाव 28 फरवरी को तब बढ़ गया था जब अमेरिका और इज़रायल ने तेहरान समेत कई ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, वरिष्ठ सैन्य कमांडर और कई नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी और इज़रायली ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे और होर्मुज पर अपना नियंत्रण और कड़ा कर दिया था।

इनपुट: IANS

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