शनिवार, 25 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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सऊदी अरब-इजरायल संबंध: व्हाइट हाउस ने परमाणु समझौते को अब्राहम अकॉर्ड्स से जोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्य-पूर्व रणनीति में सऊदी अरब और इजरायल के बीच संबंधों को सामान्य बनाना एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बना हुआ है। व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को एक बार फिर इस बात पर जोर दिया…

सऊदी अरब-इजरायल संबंध: व्हाइट हाउस ने परमाणु समझौते को अब्राहम अकॉर्ड्स से जोड़ा
(फोटो: IANS)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्य-पूर्व रणनीति में सऊदी अरब और इजरायल के बीच संबंधों को सामान्य बनाना एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बना हुआ है। व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि वह सऊदी अरब को अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होते देखना चाहता है, और इसे रियाद के साथ प्रस्तावित नागरिक परमाणु समझौते से जोड़कर देखा जा रहा है।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी नेतृत्व को यह स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल के साथ संबंध सामान्य करना उनकी प्रमुख अपेक्षाओं में से एक है। उन्होंने इस मुद्दे को अमेरिकी सरकार की मध्य-पूर्व रणनीति का केंद्र बताया।

परमाणु डील और अब्राहम अकॉर्ड्स

जब मिलर से यह पूछा गया कि सऊदी अरब के साथ परमाणु समझौते को इजरायल से रिश्ते सामान्य करने की शर्त से क्यों जोड़ा जा रहा है, तो उन्होंने प्रक्रिया के क्रम पर सीधे जवाब देने से परहेज किया। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप सऊदी नेतृत्व और उसकी दीर्घकालिक रणनीतिक सोच को गहराई से समझते हैं।

मिलर ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप से बेहतर आज कोई भी अमेरिकी सऊदी अरब की सोच, वहां के प्रमुख नेताओं और दोनों देशों के रिश्तों की प्रकृति को नहीं समझता।" उन्होंने 2017 में ट्रंप के रियाद भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने सऊदी अरब को "क्षेत्रीय स्थिरता के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक" बनाने में मदद की है।

ट्रंप प्रशासन की कूटनीति

सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु वार्ता ट्रंप की मध्य-पूर्व कूटनीति का एक अहम हिस्सा रही है। उनके पहले कार्यकाल में अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को और सूडान के साथ अपने संबंधों को सामान्य किया था। कई अमेरिकी प्रशासनों का मानना है कि सऊदी अरब द्वारा इजरायल को मान्यता देना इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम होगा।

इसी बातचीत के दौरान स्टीफन मिलर ने निकारागुआ के राष्ट्रपति डैनियल ओर्टेगा की सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि समाजवादी और साम्यवादी दल सत्ता में आने के लिए चुनावी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं और फिर राजनीतिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगा देते हैं। उन्होंने लैटिन अमेरिका में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य को लेकर ट्रंप प्रशासन की "शील्ड ऑफ द अमेरिका" रणनीति का भी उल्लेख किया।

इनपुट: IANS

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