मंगलवार, 1 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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तमिलनाडु: मदुरै में पानी की भारी किल्लत, 4000 एकड़ गन्ने की फसल सूखने की कगार पर

तमिलनाडु के मदुरै जिले में हजारों गन्ना किसान अपनी फसल को लेकर गंभीर चिंता में हैं। पानी की कमी के कारण जिले के मेलूर, वाडीपट्टी और आसपास के इलाकों में लगभग 4,000 एकड़ में लगी गन्ने की फसल पर सूख…

तमिलनाडु: मदुरै में पानी की भारी किल्लत, 4000 एकड़ गन्ने की फसल सूखने की कगार पर
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु के मदुरै जिले में हजारों गन्ना किसान अपनी फसल को लेकर गंभीर चिंता में हैं। पानी की कमी के कारण जिले के मेलूर, वाडीपट्टी और आसपास के इलाकों में लगभग 4,000 एकड़ में लगी गन्ने की फसल पर सूख जाने का खतरा मंडरा रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर अगले कुछ हफ्तों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है।

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किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिंचाई के स्रोतों का सूखना है। कई गांवों में सिंचाई के कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं और जमीन के नीचे पानी का स्तर भी तेजी से गिरा है। इसके चलते किसानों को अपनी खड़ी फसल बचाने के लिए पूरी तरह से बोरवेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, लेकिन वे भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। पानी की कमी का असर नए लगाए गए गन्ने की बढ़त पर भी दिख रहा है, जो काफी धीमी हो गई है।

दोहरी मार झेल रहे किसान

सिंचाई के संकट के अलावा, स्थानीय किसान एक और बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं। अलंगनल्लूर में स्थित नेशनल कोऑपरेटिव शुगर मिल पिछले आठ सालों से बंद पड़ी है, जो कभी इस इलाके के गन्ना किसानों के लिए खरीद और मार्केटिंग का एक प्रमुख और भरोसेमंद केंद्र हुआ करती थी।

किसानों का कहना है कि मिल के बंद होने और बार-बार सिंचाई की समस्याओं के कारण अलंगनल्लूर और आस-पास के क्षेत्रों में गन्ने की खेती के रकबे में भारी कमी आई है। किसान संगठनों ने एक प्रस्ताव पारित कर सरकार से मिल को फिर से खोलने के लिए जरूरी फंड मुहैया कराने और संकटग्रस्त किसानों की मदद करने की अपील की है।

विरोध प्रदर्शन की तैयारी

अपनी मांगों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए, किसानों ने सितंबर के पहले सप्ताह में अलंगनल्लूर से मदुरै जिला कलेक्ट्रेट तक एक वॉकथॉन (पदयात्रा) निकालने का फैसला किया है। इस प्रदर्शन के जरिए वे सरकार पर सिंचाई संकट का समाधान करने और बंद पड़ी कोऑपरेटिव शुगर मिल को दोबारा शुरू करने के लिए दबाव बनाना चाहते हैं। किसानों का आरोप है कि बीते आठ वर्षों में कई बार विरोध प्रदर्शन करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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