सरकारी चावल आवंटन में करोड़ों का घोटाला: CBI ने FCI और NERAMAC के अधिकारियों पर केस दर्ज किया
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अधिकारियों और अन्य के खिलाफ रियायती दर पर चावल के आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर एक मामला दर्ज किया है। इस मामले में सरकारी खजाने को करीब…
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अधिकारियों और अन्य के खिलाफ रियायती दर पर चावल के आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर एक मामला दर्ज किया है। इस मामले में सरकारी खजाने को करीब 28.87 करोड़ रुपए का सीधा नुकसान पहुंचाने का आरोप है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की एक सतर्कता रिपोर्ट के बाद हुई है।
मामले में एफसीआई (दिल्ली) के तत्कालीन अधिकारियों के अलावा नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (NERAMAC) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। इनके साथ कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारी और अन्य लोग भी जांच के दायरे में हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह घोटाला तब सामने आया जब जून महीने में मंत्रालय के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की विजिलेंस रिपोर्ट में गड़बड़ियों का खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि एफसीआई के दिल्ली क्षेत्र ने NERAMAC को कुल 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया था, जिसमें से 50,645 मीट्रिक टन चावल उठा भी लिया गया।
यह आवंटन 23,200 रुपए प्रति मीट्रिक टन की रियायती दर पर किया गया, जबकि उस समय चावल की बाजार या आरक्षित कीमत लगभग 28,900 रुपए प्रति मीट्रिक टन थी। सतर्कता रिपोर्ट के मुताबिक, यदि यही चावल ई-नीलामी के जरिए बेचा जाता तो एफसीआई को करीब 28.87 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व मिलता।
कैसे तोड़े गए नियम?
जांच कमेटी ने पाया कि नियमों के तहत NERAMAC बिना ई-नीलामी के इस तरह से चावल प्राप्त करने के लिए पात्र ही नहीं था। यह सुविधा केवल राज्य सरकारों और उनके निगमों के लिए थी, न कि केंद्र सरकार की किसी कंपनी के लिए। एक और बड़ी अनियमितता यह सामने आई कि चावल के आवंटन का भुगतान सीधे NERAMAC से नहीं, बल्कि चावल मिल मालिकों और थोक डीलरों जैसी निजी कंपनियों के माध्यम से किया गया था।
इसके अतिरिक्त, जांच में ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला जो यह साबित कर सके कि NERAMAC को दिया गया चावल उसी उद्देश्य के लिए जनता में वितरित किया गया था जिसके लिए इसे आवंटित किया गया था। यही नहीं, पुराना स्टॉक पहले निकालने के लिए बने 'फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट' (FIFO) नियम का भी पालन नहीं किया गया। इन सभी निष्कर्षों के आधार पर अब सीबीआई ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
इनपुट: IANS



