लश्कर की महिला विंग 'तैय्यबात' सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती, AI ट्रेनिंग और स्वैच्छिक भर्ती से बढ़ा खतरा
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की महिला शाखा 'तैय्यबात' की बढ़ती सक्रियता को लेकर अलर्ट पर हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस विंग का तेजी से विस्तार हो रहा…
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की महिला शाखा 'तैय्यबात' की बढ़ती सक्रियता को लेकर अलर्ट पर हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस विंग का तेजी से विस्तार हो रहा है और चिंता की सबसे बड़ी वजह यह है कि इसमें शामिल होने वाली अधिकांश महिलाएं अपनी मर्जी से आ रही हैं, जो गहरी कट्टरता का संकेत है।
साल 2025 में स्थापित इस महिला विंग ने 2026 की शुरुआत तक बड़ी संख्या में महिलाओं की भर्ती की है। एजेंसियों के लिए यह बात हैरान करने वाली है कि 'तैय्यबात' में लगभग 80 प्रतिशत भर्तियां स्वैच्छिक रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह एक बेहद खतरनाक संकेत है, जो दिखाता है कि महिलाओं के मन में भारत के प्रति गहरी नफरत पैदा की गई है।
AI और प्रचार का नया मोर्चा
यह महिला विंग अब सिर्फ कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रशिक्षण में भी मुख्य भूमिका निभा रही है। हाल ही में लश्कर ने भविष्य के प्रचार और आतंकी गतिविधियों के लिए AI के महत्व पर जोर दिया था, जिसके बाद बड़ी संख्या में महिलाओं को इसका प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षित महिलाएं अब नए सदस्यों को भी ट्रेनिंग दे रही हैं।
एक खुफिया ब्यूरो (आईबी) अधिकारी ने कहा कि आने वाले समय में 'तैय्यबात' अपने मूल संगठन लश्कर-ए-तैयबा से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। फिलहाल इन महिला सदस्यों को आत्मघाती हमलों के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जा रहा है, लेकिन वे भर्ती, प्रचार और AI ट्रेनिंग जैसे कामों में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।
'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद बदली रणनीति
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' में लश्कर को भारी नुकसान हुआ था। इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे, जिनमें लश्कर के दो शीर्ष कमांडर खालिद उर्फ अबू अकाशा और मुदस्सर खडियान खास उर्फ अबू जिंदल भी शामिल थे। इस बड़ी कार्रवाई के बाद लश्कर को दोबारा संगठन खड़ा करने और भर्ती करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
अधिकारियों के अनुसार, इसी पृष्ठभूमि में लश्कर ने 'तैय्यबात' के जरिए नई रणनीति अपनाई। शुरुआत में मारे गए आतंकियों की तस्वीरों का इस्तेमाल कर महिलाओं में सहानुभूति पैदा की गई, लेकिन बाद में यह एक श्रृंखला बन गई और महिलाएं स्वेच्छा से जुड़ने लगीं। ये महिलाएं अब युवाओं को लश्कर से जोड़ने में काफी प्रभावी साबित हो रही हैं।
अन्य आतंकी संगठनों से तुलना
इसके विपरीत, जैश-ए-मोहम्मद के महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात (जेयूएम)' की गतिविधियां 'तैय्यबात' की तुलना में काफी सीमित हैं। अक्टूबर 2025 में मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के नेतृत्व में शुरू हुआ यह संगठन उतना प्रभावी नहीं हो पाया है। अधिकारियों का मानना है कि इसका एक कारण लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का संगठनात्मक रूप से अधिक सक्रिय होना है, जबकि 'ऑपरेशन सिंदूर' में परिवार के सदस्यों को खोने और खराब स्वास्थ्य के कारण जैश प्रमुख मसूद अजहर सार्वजनिक रूप से निष्क्रिय है।
इनपुट: IANS



