कर्नाटक: 'वंदे मातरम' पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने, फैसले को लेकर बढ़ा राजनीतिक टकराव
कर्नाटक में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति के उस फैसले पर दोनों दल आमने-सामने हैं…
कर्नाटक में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति के उस फैसले पर दोनों दल आमने-सामने हैं, जिसमें गीत के सिर्फ शुरुआती दो पद गाने की बात कही गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, जहां कांग्रेस के नेता इस निर्णय का समर्थन कर रहे हैं, वहीं भाजपा ने इसे देश की संस्कृति और राष्ट्रीय आंदोलन का अपमान बताया है।
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में अपनी पार्टी के फैसले का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा, “हम 'वंदे मातरम' के सिर्फ दो ही पैरा गाएंगे। वे हमें जेल भेज दें या फांसी दे दें, हम तैयार हैं। हम भाजपा की तरह डरपोक नहीं हैं।” हरिप्रसाद ने तर्क दिया कि 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित मूल गीत में दो ही पद थे और भाजपा इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है।
कांग्रेस का तर्क और भाजपा पर निशाना
बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि कांग्रेस के इस रुख में तुष्टीकरण जैसा कुछ भी नहीं है। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा, “अगर भाजपा नेता खुद को देशभक्त मानते हैं तो उन्हें संघ की शाखाओं में राष्ट्रगान गाना चाहिए।” उन्होंने अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत की प्रशंसा करने पर भी भाजपा नेताओं पर सवाल उठाया। हरिप्रसाद ने पूछा कि अगर संसद में कंगना के किसी गाने को राष्ट्रगान बताया जाए तो क्या वे उसे स्वीकार करेंगे।
भाजपा का पलटवार: 'देशभक्ति से कोई संबंध नहीं'
वहीं, कांग्रेस के इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के उपनेता अरविंद बेलाड ने आरोप लगाया कि यह निर्णय दिखाता है कि “कांग्रेस और देशभक्ति के बीच कोई संबंध नहीं है।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस देश की संस्कृति का सम्मान नहीं किया है।
बेलाड ने स्वतंत्रता संग्राम में 'वंदे मातरम' के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह गीत युवाओं और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, “अगर सोनिया गांधी, कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस वर्किंग कमेटी पूरा वंदे मातरम गाने को तैयार नहीं हैं तो इससे पता चलता है कि उन्हें भारत और उसकी संस्कृति की कोई परवाह नहीं है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मुद्दों पर कांग्रेस का यही रवैया अतीत में मतदाताओं द्वारा पार्टी को नकारने की एक वजह रहा है।
इनपुट: IANS



