मंगलवार, 21 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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अमेरिका के नए वीज़ा नियम से छात्रों की पढ़ाई और रिसर्च पर संकट, डिग्री बीच में छूटने का खतरा

अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े वीज़ा नियमों में एक बड़े बदलाव से हजारों विद्यार्थियों की डिग्री और शोध कार्य बीच में ही रुक सकते हैं। एक नए नियम के तहत, F-1 और J-1 वीज़ा पर अमेरिका में…

अमेरिका के नए वीज़ा नियम से छात्रों की पढ़ाई और रिसर्च पर संकट, डिग्री बीच में छूटने का खतरा
(फोटो: IANS)

अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े वीज़ा नियमों में एक बड़े बदलाव से हजारों विद्यार्थियों की डिग्री और शोध कार्य बीच में ही रुक सकते हैं। एक नए नियम के तहत, F-1 और J-1 वीज़ा पर अमेरिका में रहने की अधिकतम समय-सीमा चार साल तय कर दी गई है, जिससे कई छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी होने से पहले ही देश छोड़ना पड़ सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव को लेकर 'फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज' (FIIDS) नामक एक नीति समूह ने गंभीर चिंता जताई है।

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FIIDS ने अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) द्वारा लाए गए इस नियम को तत्काल लागू करने पर रोक लगाएं। यह नियम 16-17 जुलाई को अंतिम रूप दिया गया था और इसके सितंबर के मध्य से प्रभावी होने की उम्मीद है।

क्या हैं प्रमुख बदलाव?

इस नए नियम के लागू होने से छात्रों के लिए कई वर्षों से चली आ रही 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' नीति खत्म हो जाएगी। इसके तहत, अब तक छात्र अपनी पढ़ाई की पूरी अवधि तक वैध स्थिति में रह सकते थे। नई व्यवस्था में न केवल रहने की अधिकतम सीमा चार साल कर दी गई है, बल्कि ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) और STEM OPT की अवधि को भी इसी चार साल में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाली 60 दिनों की रियायती अवधि (ग्रेस पीरियड) को भी घटाकर सिर्फ 30 दिन कर दिया गया है। किसी भी तरह की समय-सीमा बढ़वाने के लिए छात्रों को अब फॉर्म I-539 के जरिए USCIS से पहले ही मंजूरी लेनी होगी।

नियमों का अकादमिक जगत पर प्रभाव

FIIDS में नीति और रणनीति के प्रमुख, खंडेराव कंद ने इस नियम को "अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मकता पर खुद से किया गया घाव" बताया है। उन्होंने कहा, “4 साल की सीमा आधुनिक डिग्रियों की वास्तविकता से मेल नहीं खाती, जहां स्नातक के लिए औसत समय लगभग 52 महीने और पीएचडी के लिए करीब 5.7 साल है।” उन्होंने यह भी बताया कि USCIS के पास पहले से ही 11 मिलियन से ज्यादा मामले लंबित हैं, जिनमें करीब एक साल का प्रोसेसिंग समय लगता है।

संगठन ने चेतावनी दी है कि डॉक्टोरल कोर्स और मेडिकल ट्रेनिंग जैसे कई शोध-केंद्रित कार्यक्रम नियमित रूप से चार साल से अधिक समय तक चलते हैं। J-1 वीज़ा पर आने वाले रिसर्च स्कॉलर्स और डॉक्टरों को भी अपने प्रोग्राम पूरे करने में अक्सर पांच से सात साल लग जाते हैं। कंद ने कहा, "छात्रों को प्रोग्राम या रिसर्च के बीच में ही बाहर कर दिया जाएगा, प्रयोगशालाएं जरूरी प्रतिभा खो देंगी और अमेरिका अपनी इनोवेशन पाइपलाइन प्रतिस्पर्धियों को सौंप देगा।"

सुधार के लिए क्या सुझाव दिए गए?

FIIDS ने अमेरिकी कांग्रेस से F-1 और J-1 वीज़ा धारकों के लिए 'ड्यूरेशन-ऑफ-स्टेटस' सुरक्षा को फिर से बहाल करने की अपील की है। समूह ने USCIS से छात्रों को प्रशासनिक राहत देने का भी आग्रह किया है। सुझावों में अच्छी अकादमिक स्थिति वाले छात्रों को स्वतः एक्सटेंशन देना, OPT और STEM OPT को चार साल की सीमा से बाहर रखना, और 60 दिन की ग्रेस पीरियड को बहाल करना शामिल है। समूह का दावा है कि 2025 के फॉल सेमेस्टर में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के दाखिले में 17% की गिरावट आई है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 1.1 अरब डॉलर से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ और लगभग 23,000 नौकरियों पर असर पड़ा।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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