मंगलवार, 28 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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UN मानवाधिकार प्रमुख पर बढ़ा टकराव: सुरक्षा परिषद में फ्रांस के बोलते ही अमेरिकी प्रतिनिधि बाहर निकले

संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क की दोबारा नियुक्ति को लेकर दो प्रमुख पश्चिमी सहयोगियों, अमेरिका और फ्रांस, के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…

UN मानवाधिकार प्रमुख पर बढ़ा टकराव: सुरक्षा परिषद में फ्रांस के बोलते ही अमेरिकी प्रतिनिधि बाहर निकले
(फोटो: IANS)

संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क की दोबारा नियुक्ति को लेकर दो प्रमुख पश्चिमी सहयोगियों, अमेरिका और फ्रांस, के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद इतना बढ़ गया कि सोमवार को यूक्रेन पर चर्चा के लिए बुलाई गई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने फ्रांस के प्रतिनिधि के बोलना शुरू करते ही वॉकआउट कर दिया।

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यह घटनाक्रम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन और अमेरिका के पारंपरिक सहयोगियों के बीच बढ़ते मतभेदों का एक दुर्लभ और स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। आमतौर पर करीबी सहयोगियों के खिलाफ इस तरह का कदम नहीं उठाया जाता। अमेरिकी राजनयिक डैन नेग्रिया ने फ्रांस पर "दिखावटी नैतिकता" का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक फ्रांस अपनी "अहंकारी और अपमानजनक भाषा" नहीं छोड़ता, तब तक अमेरिका उसकी "राजनीतिक बयानबाजी" नहीं सुनेगा।

विवाद की जड़ और मतदान

इस टकराव की शुरुआत शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए उस मतदान से हुई, जिसमें ऑस्ट्रिया के वोल्कर टर्क को मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में दूसरा कार्यकाल दिए जाने का फैसला हुआ। अमेरिका और रूस दोनों ने उनकी पुनर्नियुक्ति का जोरदार विरोध किया था, लेकिन वे इसे रोकने में नाकाम रहे।

टर्क को अक्टूबर से शुरू हो रहे उनके दूसरे कार्यकाल के लिए 144 देशों का समर्थन मिला, जबकि 10 देशों ने उनके खिलाफ मतदान किया और 13 देश अनुपस्थित रहे। खास बात यह है कि वोल्कर टर्क द्वारा भारत की आलोचना किए जाने के बावजूद, भारत ने उनकी पुनर्नियुक्ति के पक्ष में मतदान किया।

सोशल मीडिया पर बढ़ा तनाव

मतदान के बाद फ्रांस के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने इस विवाद को और हवा दे दी। जिनेवा स्थित फ्रांस के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने अपने आधिकारिक 'X' अकाउंट पर लिखा, "अमेरिका पहले मानवाधिकार का प्रतीक हुआ करता था लेकिन अब नहीं। आज, यह उत्तर कोरिया, निकारागुआ, माली और रूस के साथ अलग-थलग खड़ा है और दुनिया अब इनकी बात नहीं सुनती।"

इस पर पलटवार करते हुए संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज ने फ्रांस पर दुनिया के सबसे दमनकारी शासनों को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि फ्रांस एक ऐसे व्यक्ति का समर्थन कर रहा है जो अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल जैसे लोकतांत्रिक देशों को नसीहत देता है, लेकिन दमनकारी शासनों पर नरम रहता है।

दोनों पक्षों के आरोप

हालांकि अमेरिका और रूस दोनों ही टर्क के विरोध में थे, लेकिन दोनों ने उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। अमेरिकी प्रतिनिधि बार्टोस ने कहा कि टर्क स्वतंत्र लोकतांत्रिक देशों, खासकर इजरायल की, किसी भी अन्य देश से ज़्यादा आलोचना करते हैं। वहीं, रूस के उप-स्थायी प्रतिनिधि दिमित्री चुमाकोव ने आरोप लगाया कि टर्क और उनका कार्यालय पश्चिमी देशों के भू-राजनीतिक हितों को आगे बढ़ा रहे हैं।

इनपुट: IANS

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