गुरूवार, 20 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
दुनिया

बच्चों से जुड़े यौन शोषक विज्ञापनों पर मेटा से अमेरिकी सीनेटर ने मांगे जवाब, भारत का भी किया ज़िक्र

अमेरिकी सीनेटर मार्क वॉर्नर ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को एक पत्र भेजकर उन सशुल्क विज्ञापनों पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिनमें कथित तौर पर बच्चों की यौन शोषण सामग्री (CSAM) और बिना सहमति वाले अंतरंग…

बच्चों से जुड़े यौन शोषक विज्ञापनों पर मेटा से अमेरिकी सीनेटर ने मांगे जवाब, भारत का भी किया ज़िक्र
(फोटो: IANS)

अमेरिकी सीनेटर मार्क वॉर्नर ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को एक पत्र भेजकर उन सशुल्क विज्ञापनों पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिनमें कथित तौर पर बच्चों की यौन शोषण सामग्री (CSAM) और बिना सहमति वाले अंतरंग चित्र (NCII) दिखाए जा रहे थे। 18 अगस्त को भेजे गए इस पत्र में, वर्जीनिया के डेमोक्रेट सीनेटर ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि मेटा ने न केवल अपने प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी सामग्री चलने दी, बल्कि संभवतः उससे आर्थिक लाभ भी कमाया।

विज्ञापन

समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, वॉर्नर ने अपने पत्र में टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट (TTP) की एक शोध रिपोर्ट का हवाला दिया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, मैसेंजर और थ्रेड्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर नौ महीने की अवधि में AI से बनाए गए बाल यौन शोषण से जुड़े दर्जनों पेड विज्ञापन चलाए। शोधकर्ताओं को मेटा की सार्वजनिक विज्ञापन लाइब्रेरी में बच्चों के शोषण से संबंधित 50 से अधिक तस्वीरों और वीडियो वाले विज्ञापन मिले थे।

मेटा की समीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल

सीनेटर वॉर्नर ने सवाल उठाया कि ये विज्ञापन मेटा की समीक्षा प्रणाली से कैसे पास हो गए, जबकि कंपनी दावा करती है कि वह सभी विज्ञापनों की समीक्षा और स्वीकृति करती है। उन्होंने पत्र में लिखा, "यह पूरी तरह अस्वीकार्य है कि इस प्रकार की सामग्री मेटा के प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे और इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि आपकी कंपनी इससे लाभ कमाती हुई प्रतीत होती है।"

रिपोर्ट के अनुसार, ये विज्ञापन नवंबर 2025 से अगस्त 2026 की शुरुआत तक प्रसारित हुए और अमेरिका, ब्रिटेन समेत एक दर्जन से ज्यादा यूरोपीय देशों के उपयोगकर्ताओं तक पहुँचे। कम से कम एक विज्ञापन यूरोप में 2,500 से अधिक सोशल मीडिया खातों तक पहुँचा था।

विज्ञापनों की प्रकृति और भारत का संदर्भ

इन विज्ञापनों में से कुछ ऐसे ऐप्स या वेबसाइटों को बढ़ावा दे रहे थे जो कृत्रिम रूप से किसी की तस्वीर को नग्न ("न्यूडिफाई") बना सकते थे। कुछ विज्ञापनों में बच्चों की तस्वीरों का इस्तेमाल आपत्तिजनक वयस्क सामग्री के थंबनेल के रूप में किया गया था। वॉर्नर ने अपने पत्र में उस पूर्व जांच का भी उल्लेख किया, जो जुलाई 2026 में बीबीसी द्वारा भारत में इंस्टाग्राम पर इसी तरह के विज्ञापनों के चलने के मामले में की गई थी। शोधकर्ताओं ने पाया कि मेटा को इस बारे में सूचित किए जाने के बाद भी नए विज्ञापन सामने आते रहे।

सीनेटर द्वारा मांगी गई विस्तृत जानकारी

मार्क वॉर्नर ने 26 अगस्त तक मेटा से कई अहम सवालों के जवाब देने को कहा है। उन्होंने पूछा है कि इन विज्ञापनों से कंपनी को कितनी आय हुई और इस तरह की सामग्री को हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए। इसके अलावा, उन्होंने निम्नलिखित जानकारी भी मांगी है:

  • प्रत्येक विज्ञापन की पहचान, उसे हटाने और राष्ट्रीय केंद्र (NCMEC) को रिपोर्ट करने की तारीखें।
  • 11 चीनी पुनर्विक्रेताओं द्वारा दिए गए उन विज्ञापनों का विवरण, जिन्हें नीतियों के उल्लंघन के कारण हटाया गया।
  • इन विज्ञापनों की प्रसारण तिथियां, लक्ष्य, कुल इंप्रेशन और मेटा को मिला भुगतान।
  • 2025 और 2026 के दौरान अमेरिका में 13 से 18 साल के किशोरों को दिखाए गए ऐसे विज्ञापनों का आंकड़ा, जिन्हें बाद में आपत्तिजनक सामग्री के कारण चिह्नित किया गया।

गौरतलब है कि वॉर्नर ने जुलाई में 'सेफ एआई एक्ट' नामक एक विधेयक भी पेश किया था, जिसका उद्देश्य ऐसी AI प्रणालियों पर रोक लगाना है जो बाल यौन शोषण सामग्री बना सकती हैं।

इनपुट: IANS

N

News4Social इंटरनेशनल डेस्क

News4Social इंटरनेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →