भारत-सिंगापुर गोलमेज सम्मेलन: आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नए दौर में ले जाने पर हुई चर्चा
भारत और सिंगापुर ने अपने व्यापक रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। सिंगापुर में आयोजित चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन (ISMR) के दौरान दोनों देशों के…
भारत और सिंगापुर ने अपने व्यापक रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। सिंगापुर में आयोजित चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन (ISMR) के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों पर गहन मंथन किया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात कर द्विपक्षीय साझेदारी की अब तक की प्रगति का जायजा लिया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में भारतीय दल में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री जितिन प्रसाद शामिल थे। इस उच्च-स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य आर्थिक सहयोग, डिजिटल बदलाव, परिवहन संपर्क, कौशल विकास और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय भागीदारी को और गहरा करना था।
सहयोग के मुख्य स्तंभ और भविष्य की दिशा
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस गोलमेज सम्मेलन में सहयोग के छह प्रमुख स्तंभों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया। इनमें उन्नत विनिर्माण, कनेक्टिविटी, डिजिटलीकरण, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सतत विकास शामिल हैं। नेताओं ने इन क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा करने के साथ-साथ उभरती प्रौद्योगिकियों और नई आर्थिक संभावनाओं में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी बल दिया।
द्विपक्षीय बैठकें और रणनीतिक संवाद
इस सम्मेलन से पहले बुधवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने सिंगापुर समकक्ष विवियन बालाकृष्णन के साथ एक विस्तृत बैठक की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने न केवल अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की, बल्कि मौजूदा वैश्विक और भू-राजनीतिक हालात पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
जयशंकर ने इस मुलाकात पर कहा, "मेरे मित्र और सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन से मुलाकात कर खुशी हुई। हमने हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर विस्तृत चर्चा की।" इसके अलावा, दोनों विदेश मंत्रियों ने सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग के नए चांसरी परिसर की आधारशिला भी रखी, जिसे जयशंकर ने दोनों देशों के संबंधों के नए चरण का प्रतीक बताया।
इनपुट: IANS



