बुधवार, 30 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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अमेरिका में प्रवासियों का निर्वासन: ट्रंप-युग की विवादित 'थर्ड-कंट्री' नीति को सुप्रीम कोर्ट से अस्थायी अनुमति

अमेरिका में प्रवासियों के निर्वासन से जुड़ी ट्रंप प्रशासन की एक अहम नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अस्थायी राहत दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशासन को उन प्रवासियों को किसी तीसरे देश में निर्वासि…

अमेरिका में प्रवासियों का निर्वासन: ट्रंप-युग की विवादित 'थर्ड-कंट्री' नीति को सुप्रीम कोर्ट से अस्थायी अनुमति
(फोटो: IANS)

अमेरिका में प्रवासियों के निर्वासन से जुड़ी ट्रंप प्रशासन की एक अहम नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अस्थायी राहत दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशासन को उन प्रवासियों को किसी तीसरे देश में निर्वासित करने की प्रक्रिया फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है, जिनके अपने देश से वे नहीं हैं। यह अनुमति तब तक के लिए है जब तक अदालत इस नीति की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं कर लेती।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मैसाचुसेट्स के एक फेडरल जज के फरवरी के उस आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसने इस नीति को रद्द कर दिया था। निचली अदालत ने कहा था कि प्रवासियों को निर्वासित करने से पहले उन्हें उचित सूचना और उत्पीड़न या यातना के डर के बारे में अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए।

क्या है यह निर्वासन नीति?

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) की इस नीति के तहत, यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम निष्कासन (final removal order) का आदेश है, तो उसे उसके मूल देश के अलावा किसी ऐसे तीसरे देश में भी भेजा जा सकता है जो उसे स्वीकार करने को तैयार हो। सरकार का तर्क है कि यह नीति 'कुछ विदेशियों को हटाने के लिए एक जरूरी हथियार है', जिनमें कई खतरनाक अपराधी भी शामिल हैं।

सरकार और प्रवासियों के वकीलों के तर्क

प्रशासन ने अदालत में कहा कि निचली अदालत के प्रतिबंधों के कारण उसे 70 आपराधिक दोषी प्रवासियों को तीन देशों में ले जाने वाली एक उड़ान रद्द करनी पड़ी, जिससे अतिरिक्त खर्च और नई कूटनीतिक बातचीत की जरूरत पड़ी। न्याय विभाग ने तर्क दिया कि निचली अदालतों ने आव्रजन और विदेश नीति जैसे मामलों में दखल देकर अपनी सीमा लांघी है।

वहीं, प्रवासियों के वकीलों का कहना है कि यह नीति लोगों को बिना उचित मौका दिए अनजान देशों में भेज सकती है। उनका आरोप है कि इससे उन लोगों को उत्पीड़न, यातना या उस देश में वापस भेजे जाने का खतरा है, जहां से अमेरिका ने उन्हें पहले ही सुरक्षा दी थी। याचिका में दावा किया गया कि निर्वासित किए गए कुछ लोगों को लंबी हिरासत, पिटाई, यौन उत्पीड़न और गायब होने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा।

अदालत के सामने अब क्या?

सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दिसंबर के सत्र में दलीलें सुनेगा और बाद में इस पर विस्तृत फैसला आने की उम्मीद है। न्यायाधीश अब यह तय करेंगे कि क्या जिला अदालत के पास इस मामले में अधिकार क्षेत्र था और क्या यह नीति संघीय आव्रजन कानून, संवैधानिक प्रक्रिया या प्रताड़ना के खिलाफ अमेरिकी दायित्वों का उल्लंघन करती है। यह फैसला सिर्फ उन लोगों से जुड़ा है जिनके खिलाफ पहले से निष्कासन का अंतिम आदेश है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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