डाक-मतदान पर ट्रंप प्रशासन के नए नियम लागू नहीं होंगे, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अमेरिका में नवंबर में होने वाले महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले, देश के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा डाक-मतदान (मेल-इन बैलेट) पर लाए गए नए और व्यापक नियमों पर रोक लगा दी है। समाचार…
अमेरिका में नवंबर में होने वाले महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले, देश के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा डाक-मतदान (मेल-इन बैलेट) पर लाए गए नए और व्यापक नियमों पर रोक लगा दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सोमवार को दिए अपने एक आदेश में अदालत ने उस आपातकालीन अपील को खारिज कर दिया, जिसमें इन नियमों पर निचली अदालत द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग की गई थी।
इस फैसले का सीधा असर 3 नवंबर को होने वाले चुनावों पर पड़ेगा, जिनमें यह तय होना है कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर किस दल का नियंत्रण होगा। अब यह सुनिश्चित हो गया है कि ये चुनाव पुराने नियमों के तहत ही होंगे। हालांकि, अदालत ने भविष्य के चुनावों में इन नियमों को लागू करने की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं किया है।
क्या थे नए नियम और क्यों हुआ विरोध?
अमेरिकी डाक सेवा ने अगस्त में ये नए नियम लागू किए थे, जो मार्च में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कार्यकारी आदेश के बाद लाए गए थे। इन नियमों के तहत राज्यों को मतपत्रों के लिफाफे नए सिरे से डिजाइन करने पड़ते। इन पर चुनावी डाक का लोगो, मशीन से पढ़े जा सकने वाले फीचर और हर मतदाता के लिए एक विशेष बारकोड लगाना अनिवार्य होता।
इसके अलावा, राज्यों को इन डिजाइनों की संघीय मंजूरी लेनी पड़ती और मतदाताओं की जानकारी एक नए डाक सेवा पोर्टल पर अपलोड करनी होती। इन नियमों का पालन न करने वाले मतपत्रों को अस्वीकार कर राज्य के चुनाव अधिकारियों को वापस भेज दिया जाता।
समय की कमी और राज्यों की आपत्ति
चुनाव अधिकारियों ने तर्क दिया कि मतदान शुरू होने के इतने करीब इन बदलावों को लागू करना संभव नहीं था। नॉर्थ कैरोलिना और विस्कॉन्सिन जैसे राज्य पहले ही मतपत्र भेजना शुरू कर चुके थे, जबकि एक दर्जन से ज्यादा अन्य राज्य भी इसी तैयारी में थे। अकेले नॉर्थ कैरोलिना में ही लगभग 3 लाख अनुपस्थित मतदाता बैलेट भेजे जा चुके थे। नॉर्थ कैरोलिना के अटॉर्नी जनरल जेफ जैक्सन ने कहा, "मतदान शुरू हो चुका है। चुनाव के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते।"
अदालत का तर्क और असहमति
सुप्रीम कोर्ट ने अपने बिना हस्ताक्षर वाले आदेश में कहा कि सरकार यह साबित नहीं कर पाई कि निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उसकी जीत की संभावना मजबूत है। जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने बहुमत के फैसले से सहमति जताते हुए कहा कि चुनाव से ठीक पहले इन नियमों को लागू करना 'मनमाना और अनुचित' होता क्योंकि अधिकारियों के पास तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं था।
हालांकि, जस्टिस सैमुअल एलिटो और क्लेरेंस थॉमस ने इस फैसले से असहमति जताई। जस्टिस एलिटो का मानना था कि डाक सेवा के पास 'डाक वितरण को नियंत्रित करने की व्यापक शक्ति' है।
इनपुट: IANS



