मध्य पूर्व में तनाव चरम पर: अमेरिका के लगातार 8वें दिन हमलों के बाद 50,000 सैनिक हाई अलर्ट पर
मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना ने लगातार आठवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि इस क्षेत्र में…
मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना ने लगातार आठवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि इस क्षेत्र में तैनात 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक पूरी तरह से सतर्क हैं और किसी भी स्थिति का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है। सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में बताया कि इन हमलों में ईरान की तटीय सैन्य निगरानी प्रणाली, हवाई रक्षा सुविधाओं, समुद्री क्षमताओं और मिसाइल व ड्रोन भंडारण स्थलों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया।
जवाबी कार्रवाई और आरोप-प्रत्यारोप
अमेरिकी सेना ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के ठिकानों पर भी हमला किया। सेंटकॉम का आरोप है कि आईआरजीसी ने ही 17 जुलाई को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया था।
दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। चीन की समाचार एजेंसी सिन्हुआ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सेना ने कहा कि उसने कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरानी सेना की वेबसाइट पर जारी बयान में कहा गया कि ये ड्रोन हमले अल-अदिरी कैंप और अली अल सलेम एयर बेस पर किए गए, जो ईरान और उसके पुलों जैसे नागरिक ढांचों पर अमेरिकी हमलों का जवाब थे।
परमाणु संयंत्र पर हमले का दावा
मामले को और गंभीर बनाते हुए ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने एक बड़ा आरोप लगाया है। संगठन के अनुसार, रविवार को दक्षिण-पश्चिमी ईरान के खुजेस्तान प्रांत में डार्कहोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण स्थल पर अमेरिकी हमला हुआ। संगठन ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है।
इनपुट: IANS



