मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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यमन संघर्ष: अमेरिका ने सऊदी अरब को रक्षा-सुरक्षा समझौते निभाने का भरोसा दिया

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब समर्थित सैन्य कार्रवाइयों के बीच अमेरिका अपने पुराने रक्षा और सुरक्षा समझौतों को निभाएगा। समाचार…

यमन संघर्ष: अमेरिका ने सऊदी अरब को रक्षा-सुरक्षा समझौते निभाने का भरोसा दिया
(फोटो: IANS)

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब समर्थित सैन्य कार्रवाइयों के बीच अमेरिका अपने पुराने रक्षा और सुरक्षा समझौतों को निभाएगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप रवाना होने से पहले वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रुबियो ने सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया।

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यह बयान ऐसे समय में आया है जब सऊदी अरब के समर्थन वाली यमनी सेनाएं हूती विद्रोहियों के हमलों का जवाब दे रही हैं। यह संघर्ष मुख्य रूप से एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य के पास के इलाके को लेकर केंद्रित है। मार्को रुबियो से इन सैन्य अभियानों में अमेरिकी भूमिका, विशेष रूप से हवाई मदद की संभावना को लेकर सवाल पूछा गया था।

रक्षा समझौते पर अमेरिका का रुख

हालांकि, रुबियो ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया कि अमेरिका हवाई सैन्य सहायता देगा या नहीं। उन्होंने जॉइंट बेस एंड्रयूज में कहा, "अमेरिका का सऊदी अरब के साथ रक्षा और सुरक्षा समझौता है और हम इसे निभाने का इरादा रखते हैं। मैं इससे ज्यादा जानकारी पर चर्चा नहीं करूंगा।" उन्होंने इन सैन्य कार्रवाइयों को जवाबी कार्रवाई बताया, जिसका उद्देश्य उन इलाकों को वापस लेना है जिन पर हूती विद्रोहियों ने पहले कब्जा कर लिया था।

सऊदी अरब की कार्रवाई को बताया जायज

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि हूती विद्रोहियों से उत्पन्न खतरे को देखते हुए सऊदी अरब के पास जवाबी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा, "सऊदी अरब पर हूतियों ने हमला किया है और वह इससे पैदा होने वाले खतरे को समझता है। उसे अपनी रक्षा करने का अधिकार है।" उन्होंने यह भी बताया कि हूती पहले भी यमन के आसपास के समुद्री व्यापारिक और सैन्य जहाजों के लिए खतरा पैदा कर चुके हैं, जिससे इस इलाके पर नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

गौरतलब है कि यमन कई वर्षों से गृहयुद्ध से जूझ रहा है। 2014 में हूती विद्रोहियों द्वारा राजधानी सना पर कब्जा करने के बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में एक सैन्य गठबंधन ने हस्तक्षेप किया था। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से रक्षा सहयोग, हथियारों की बिक्री और सैन्य प्रशिक्षण सहित मजबूत सुरक्षा संबंध रहे हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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