सोमवार, 28 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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संयुक्त राष्ट्र के अगले प्रमुख की तलाश तेज: पहली महिला महासचिव की उम्मीद और बड़े सुधारों की चुनौती

संयुक्त राष्ट्र में अगले महासचिव के चुनाव को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है, क्योंकि दुनिया भर के नेता इस वैश्विक संस्था के लिए एक मज़बूत नेतृत्व की ज़रूरत पर ज़ोर दे रहे हैं। इसी बीच, कैरेबियाई देश बहामास…

संयुक्त राष्ट्र के अगले प्रमुख की तलाश तेज: पहली महिला महासचिव की उम्मीद और बड़े सुधारों की चुनौती
(फोटो: IANS)

संयुक्त राष्ट्र में अगले महासचिव के चुनाव को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है, क्योंकि दुनिया भर के नेता इस वैश्विक संस्था के लिए एक मज़बूत नेतृत्व की ज़रूरत पर ज़ोर दे रहे हैं। इसी बीच, कैरेबियाई देश बहामास ने गुयाना की एक महिला राजनयिक का समर्थन कर इतिहास बनाने की वकालत की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर वह चुनी जाती हैं, तो संयुक्त राष्ट्र के 80 साल के इतिहास में पहली महिला महासचिव बनेंगी।

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बहामास के प्रधानमंत्री फिलिप डेविस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में गुयाना की यूएन राजदूत कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट की उम्मीदवारी का समर्थन किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 1945 में अपनी स्थापना के बाद से संयुक्त राष्ट्र के सभी नौ महासचिव पुरुष रहे हैं। इसके अलावा, कैरेबियाई क्षेत्र से भी अब तक किसी को यह पद नहीं मिला है। गुयाना ने रोड्रिग्स-बिर्केट को औपचारिक रूप से अपना उम्मीदवार बनाया है, और उन्होंने जून में सदस्य देशों के साथ एक संवाद सत्र में भी हिस्सा लिया था।

विभिन्न देशों की उम्मीदें और प्राथमिकताएं

अगले महासचिव का चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब संयुक्त राष्ट्र कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। इनमें यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका में चल रहे युद्ध, वैश्विक आर्थिक दबाव, बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा परिषद की प्रभावशीलता पर उठते सवाल शामिल हैं। कई देशों ने अपने भावी नेतृत्व से अपनी उम्मीदें साफ कर दी हैं।

चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने कहा कि बीजिंग एक ऐसा महासचिव चाहता है जो 'संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करे, जिसके पास बेहतरीन क्षमता हो, जो ईमानदारी और निष्पक्षता बनाए रखे और साहस तथा समर्पण के साथ काम करे।' जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के अनुसार, अगले प्रमुख को न सिर्फ़ संघर्षों का प्रबंधन करना चाहिए, बल्कि उनके समाधान में भी मदद करनी चाहिए और यूएन में बड़े सुधारों का नेतृत्व करना चाहिए।

सुधारों पर केंद्रित बहस

संयुक्त राष्ट्र के भविष्य को लेकर सदस्य देशों के बीच एक बड़ी बहस छिड़ गई है। चेक गणराज्य के राष्ट्रपति पेट्र पावेल ने कहा कि मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के उत्तराधिकारी की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी यूएन को बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के मुताबिक ढालना होगी। उन्होंने कहा, "कूटनीति की सबसे ज्यादा जरूरत दोस्तों के बीच नहीं, बल्कि विरोधियों के बीच होती है।"

ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा कि सुरक्षा परिषद की विफलता के कारण यूएन की विश्वसनीयता में भारी गिरावट आई है। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी संस्थागत सुधारों की मांग करते हुए चेतावनी दी कि दुनिया को अंतरराष्ट्रीय नियमों या 'जंगल के कानून' में से किसी एक को चुनना होगा। अमेरिका का दृष्टिकोण कुछ अलग रहा, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बजट कटौती और पद खत्म करने जैसे सुधारों का उल्लेख किया।

चुनाव की प्रक्रिया और बड़ी चुनौतियां

नए महासचिव के चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व एक अहम मुद्दा बनकर उभरा है। मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल 2026 के अंत में समाप्त होगा और उनके उत्तराधिकारी 1 जनवरी 2027 से पदभार संभालेंगे। हालांकि, अंतिम निर्णय सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों - चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका - की सहमति पर बहुत अधिक निर्भर करेगा, क्योंकि वे किसी भी उम्मीदवार को वीटो कर सकते हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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