शिंदे गुट को लोकसभा में बड़ी जीत, 6 सांसदों के विलय को स्पीकर ने दी मान्यता, ठाकरे गुट को झटका
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे…
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, शिंदे गुट के नेताओं ने इस फैसले को संविधान और कानून के अनुरूप बताते हुए इसका स्वागत किया है।
संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले शनिवार को लिए गए इस फैसले ने दलबदल विरोधी कानून के तहत इन छह सांसदों के पार्टी बदलने को वैधता प्रदान कर दी है। अब ये सभी सांसद आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट का हिस्सा माने जाएंगे, न कि उद्धव ठाकरे गुट का। शिंदे खेमे ने इसे अपनी 'प्रगतिशील राजनीति' की जीत और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के कमजोर होने का संकेत बताया है।
संविधान और कानून के दायरे में फैसला: शिंदे गुट
इस विलय को लेकर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का यह आदेश पूरी तरह से संवैधानिक है। उन्होंने कहा, "इन छह सांसदों ने कोई गैरकानूनी कदम नहीं उठाया है। कानून उन्हें यह अधिकार देता है कि अगर उनके पास दो तिहाई बहुमत है तो वे किसी भी पार्टी में शामिल हो सकते हैं।"
उद्धव ठाकरे पर निशाना
निरुपम ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता का भरोसा उनकी पार्टी से उठ चुका है। उन्होंने कहा, "पार्टी लगातार छोटी होती जा रही है, टूट रही है और बिखर रही है। अपनी पार्टी को बचाने की कोशिश में वे सिर्फ 'राम रक्षा स्तोत्र' का पाठ कर रहे हैं।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ठाकरे की पार्टी ने अपनी मूल हिंदुत्व विचारधारा को त्याग दिया है और वैचारिक रूप से विरोधी दलों से गठबंधन कर लिया है। उन्होंने दावा किया, "जब पार्टी टूट रही है तो वे भगवान राम का नाम ले रहे हैं। राम के विरोधियों के साथ रहते हुए 'राम रक्षा स्तोत्र' का पाठ करना वैसा ही है जैसे रावण भगवान राम की स्तुति करे।"
शिवसेना की एक अन्य नेता शाइना एनसी ने भी इस फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि नेताओं का भरोसा एकनाथ शिंदे की प्रगतिशील राजनीति में बढ़ रहा है। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) से आत्मचिंतन करने को कहा कि उसके नेता और कार्यकर्ता पार्टी क्यों छोड़ रहे हैं।
इनपुट: IANS



