डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा आदेश: अमेरिकी चुनाव में चीनी दखल से जुड़े खुफिया दस्तावेज होंगे सार्वजनिक
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुफिया और कानून-प्रवर्तन से जुड़े दस्तावेजों के एक बड़े संग्रह को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार रात प्रसारित एक…
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुफिया और कानून-प्रवर्तन से जुड़े दस्तावेजों के एक बड़े संग्रह को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार रात प्रसारित एक भाषण में ट्रंप ने दावा किया कि ये दस्तावेज अमेरिकी चुनाव प्रणाली की गंभीर कमियों और विदेशी हस्तक्षेप के खतरों को उजागर करेंगे।
ट्रंप ने अपने भाषण में कहा, "आज रात, मैं हमारे चुनावी इंफ्रास्ट्रक्चर में मौजूद चौंकाने वाली कमियों को उजागर करने वाली अहम खुफिया जानकारी को तुरंत सार्वजनिक करने और जारी करने की घोषणा कर रहा हूं।" इन दस्तावेजों को व्हाइट हाउस की 'गवर्नमेंट ट्रांसपेरेंसी टास्क फोर्स' ने तैयार किया था और राष्ट्रपति के 'इंटेलिजेंस एडवाइजरी बोर्ड' व वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों ने इनकी समीक्षा की थी।
चीन पर 22 करोड़ वोटरों का डेटा हासिल करने का आरोप
जारी होने वाले रिकॉर्ड्स के पहले समूह से यह खुलासा हुआ है कि चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की फाइलें हासिल कर ली थीं। इन फाइलों में नाम, पते, फोन नंबर और राजनीतिक जुड़ाव जैसी निजी जानकारियां शामिल थीं, जिनका इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता था। व्हाइट हाउस की एक टास्क फोर्स ने अलग से बताया कि 20 करोड़ से अधिक वोटर रिकॉर्ड्स की सुरक्षा में सेंध लगी थी, जिससे कम से कम 18 राज्य प्रभावित हुए। इनमें अलास्का, अर्कांसस, कोलोराडो, फ्लोरिडा, मिशिगन और न्यूयॉर्क समेत 16 क्षेत्रों की पहचान सार्वजनिक की गई है।
खुफिया एजेंसियों पर जानकारी छिपाने का आरोप
ट्रंप ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों पर चीन की इन गतिविधियों की जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पहले कार्यकाल में उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने 'ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस', न्याय विभाग, FBI और CIA को इस मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। ट्रंप ने मांग की है कि किसी भी गलत काम में शामिल अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी हो।
चुनाव सुधारों की मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस से चुनाव सुधारों के लिए कानून पारित करने का आग्रह किया है। उन्होंने मतदान के लिए फोटो पहचान-पत्र और नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य करने के साथ-साथ मेल-इन बैलेट के इस्तेमाल को सीमित करने की भी वकालत की है। वहीं, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि चोरी किए गए वोटर डेटा का दुरुपयोग अनुपस्थित मतपत्रों का अनुरोध करने, वोटर का पता बदलने या पंजीकरण में फेरबदल करने के लिए हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, सभी 50 राज्यों के वोटर-रजिस्ट्रेशन सिस्टम को निशाना बनाया गया था और कम से कम 20 राज्यों में छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है।
इनपुट: IANS



