रूस से डीजल समझौते पर राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी में बगावती सुर, कानून तोड़ने के आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से जुड़े एक डीजल समझौते को लेकर उनकी अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी में गहरे मतभेद सामने आ गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के कुछ प्रभावशाली…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से जुड़े एक डीजल समझौते को लेकर उनकी अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी में गहरे मतभेद सामने आ गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के कुछ प्रभावशाली नेता ट्रंप पर कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि अन्य उनके इस कदम का बचाव कर रहे हैं। यह पूरा विवाद एक नए कानून के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जो रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध लगाता है।
यह टकराव रविवार को दो अलग-अलग टीवी कार्यक्रमों में स्पष्ट रूप से दिखा। नॉर्थ कैरोलिना से रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने एनबीसी के कार्यक्रम 'मीट द प्रेस' में कहा कि उन्हें लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप "शायद कानून तोड़ रहे हैं"। उन्होंने कहा, "यह कहने के लिए पर्याप्त आधार हैं कि राष्ट्रपति कानून का पालन नहीं कर रहे हैं।"
कानून और राष्ट्रपति के कदम पर सवाल
जिस कानून का जिक्र हो रहा है, वह 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' है, जो 18 सितंबर को लागू हुआ था। इसकी धारा 113 के तहत राष्ट्रपति को 30 दिनों के भीतर, यानी 18 अक्टूबर तक, उन देशों पर कार्रवाई करनी है जो रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों में से हैं।
टिलिस ने दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर बने इस विधेयक पर सीनेट में हुई वोटिंग का हवाला देते हुए कहा, "अगर मुझे सही याद है तो उस बिल को 86 वोट मिले थे। यह अमेरिकी सीनेट की लगभग सर्वसम्मत राय थी। लेकिन पिछले 24 घंटों में राष्ट्रपति के कदम और बयान उस बिल की भावना के बिल्कुल उलट हैं।"
टिलिस ने छह अन्य सीनेटरों के साथ एक संयुक्त बयान भी जारी किया, जिसमें ट्रंप प्रशासन से अपना रुख तुरंत बदलने की मांग की गई। इस पर रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की और जॉन कर्टिस के अलावा डेमोक्रेट सदस्यों ने भी हस्ताक्षर किए।
ट्रंप के फैसले का बचाव
वहीं दूसरी ओर, सीनेट में रिपब्लिकन व्हिप जॉन बारासो ने राष्ट्रपति ट्रंप का बचाव किया। सीबीएस के कार्यक्रम 'फेस द नेशन' में उन्होंने कहा कि यह कानून राष्ट्रपति को व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ अतिरिक्त हथियार देने के लिए बनाया गया था। बारासो के अनुसार, "यह रूस पर दबाव बनाने और उस क्षेत्र में दीर्घकालिक समाधान निकालने की कोशिश का एक और तरीका है।"
हालांकि, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स न्यूज पर स्पष्ट किया कि ग्राहम कानून डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों की खरीद पर रोक नहीं लगाता है, बल्कि सिर्फ कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर लागू होता है। कानून में राष्ट्रपति को यह अधिकार भी दिया गया है कि अगर वे इसे अमेरिका के राष्ट्रीय हित में प्रमाणित कर दें तो वे प्रतिबंधों में छूट दे सकते हैं। दोनों सीनेटरों ने अपने बयानों में सीधे तौर पर भारत का नाम नहीं लिया, लेकिन 18 अक्टूबर की समयसीमा भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इनपुट: IANS



