गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
देश

त्रिपुरा: एक दशक बाद हो रहे विलेज कमेटी चुनाव, 4500 से ज़्यादा सीटों पर मुकाबला

त्रिपुरा में 10 साल के लंबे अंतराल के बाद हो रहे विलेज कमेटी चुनावों के लिए सियासी सरगर्मी तेज़ हो गई है। राज्य की 4,597 सीटों के लिए 10,890 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है, जिनमें बड़ी…

त्रिपुरा: एक दशक बाद हो रहे विलेज कमेटी चुनाव, 4500 से ज़्यादा सीटों पर मुकाबला
(फोटो: IANS)

त्रिपुरा में 10 साल के लंबे अंतराल के बाद हो रहे विलेज कमेटी चुनावों के लिए सियासी सरगर्मी तेज़ हो गई है। राज्य की 4,597 सीटों के लिए 10,890 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है, जिनमें बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं भी शामिल हैं। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, ये चुनाव 28 सितंबर को त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) के तहत आने वाली 587 विलेज कमेटियों के लिए होंगे। इन कमेटियों को TTAADC क्षेत्र के बाहर की ग्राम पंचायतों के बराबर माना जाता है, जिससे इन चुनावों का राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है।

विज्ञापन

इन चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा अपने दो आदिवासी सहयोगी दलों — टिपरा मोथा पार्टी (TMP) और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) — के साथ गठबंधन में है। वहीं, दूसरी ओर माकपा के नेतृत्व वाला लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस मिलकर चुनौती पेश कर रहे हैं। नामांकन वापसी की आखिरी तारीख 11 सितंबर है, जिसके बाद चुनावी मुकाबले की अंतिम तस्वीर साफ होगी।

चुनावी मैदान में कौन-कौन?

त्रिपुरा राज्य चुनाव आयोग (TSEC) के अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज़्यादा 4,361 उम्मीदवार टिपरा मोथा पार्टी (TMP) ने उतारे हैं। इसके बाद माकपा के 2,456, भाजपा के 1,971, IPFT के 483 और कांग्रेस के 465 उम्मीदवार मैदान में हैं। भाकपा ने 4 उम्मीदवार खड़े किए हैं, जबकि करीब 1,150 निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कुल सीटों में से 1,169 पर केवल एक-एक नामांकन ही दाखिल हुआ है, जिससे इन उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। वहीं, तीन सीटों (मुंगियाकामी ब्लॉक में दो और हेजामारा ब्लॉक में एक) पर किसी भी दल ने पर्चा नहीं भरा है।

हिंसा और धमकी के आरोप

चुनाव प्रक्रिया के दौरान राज्य के आठों जिलों से कई हिंसक घटनाओं की खबरें भी सामने आई हैं। IPFT के वरिष्ठ नेता और मंत्री शुक्ला चरण नोआतिया ने बताया कि 8 सितंबर को खोवाई जिले के हेजामारा में उनकी पार्टी के महासचिव स्वपन देबबर्मा पर क्रूरता से हमला किया गया। उन्होंने एक बयान में कहा, "टीएमपी के समर्थकों ने देबबर्मा को उस समय निशाना बनाकर पीटा जब वह खोवाई गांव जा रहे थे। इस तरह की हिंसा बिल्कुल अस्वीकार्य है।" उन्होंने आगे कहा, "आईपीएफटी, भाजपा और टीएमपी गठबंधन के तौर पर विलेज कमेटी चुनाव एक साथ लड़ रहे हैं। इस तरह की आक्रामकता सीधे तौर पर हमारी एकता की भावना को कमजोर करती है।"

इसी तरह, माकपा और कांग्रेस ने भी आरोप लगाया है कि भाजपा और टीएमपी कार्यकर्ताओं के कथित हमलों, धमकी और बाधा डालने के कारण उनके कई उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल नहीं कर सके। लेफ्ट फ्रंट के संयोजक माणिक डे ने कहा, "हमने एसईसी से चुनाव सुचारू रूप से कराने के लिए उचित कार्रवाई करने को कहा है, लेकिन आयोग ने अभी तक हिंसा को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।"

चुनाव से पहले दिल्ली में अहम बैठक

इन चुनावों की घोषणा से पहले 4 सितंबर को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, भाजपा के नॉर्थईस्ट प्रभारी संबित पात्रा और टीएमपी प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा शामिल हुए थे। इसके बाद 6 सितंबर को अगरतला में भाजपा और टीएमपी नेताओं के बीच सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने के लिए एक और बैठक हुई, जिसमें दोनों दलों के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

इनपुट: IANS

N

News4Social नेशनल डेस्क

News4Social नेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →