बुधवार, 23 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक: वाल्मीकि निगम घोटाले पर भाजपा का हमला, मंत्री नागेंद्र के इस्तीफे की मांग तेज

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वाल्मीकि विकास निगम में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पर अपना दबाव बढ़ा दिया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने मंत्री बी. नागेंद्र के…

कर्नाटक: वाल्मीकि निगम घोटाले पर भाजपा का हमला, मंत्री नागेंद्र के इस्तीफे की मांग तेज
(फोटो: IANS)

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वाल्मीकि विकास निगम में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पर अपना दबाव बढ़ा दिया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे को "निश्चित" बताते हुए आरोप लगाया है कि दलितों के पैसे लूटे गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा ने इस मामले में सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग को लेकर राज्यपाल को एक याचिका भी सौंपी है।

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गुरुवार को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आर. अशोक ने सवाल उठाया, "जब दलितों का पैसा लूटा गया, तब उन्हें याद नहीं था कि वे दलित हैं। अब वे जातिगत संरक्षण मांग रहे हैं।" उन्होंने चंद्रशेखर नामक व्यक्ति की आत्महत्या का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कोई घोटाला नहीं हुआ, तो उन्हें यह कदम क्यों उठाना पड़ा। अशोक ने आरोप लगाया कि मंत्री नागेंद्र को मंत्रिमंडल में इसलिए वापस लिया गया है क्योंकि इससे "हाई कमांड के इस घोटाले का मास्टरमाइंड होने" की बात सामने आ सकती है।

सरकार पर चौतरफा हमला

विपक्ष के नेता ने कांग्रेस सरकार को कई अन्य मुद्दों पर भी घेरा। उन्होंने गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के आरएसएस के पंजीकरण संबंधी बयान की आलोचना करते हुए कहा कि कई क्लब, गणेश संघ और ईसाई संघ बिना पंजीकरण के काम कर रहे हैं, लेकिन केवल खड़गे के संविधान में ही आरएसएस का पंजीकरण अनिवार्य है। उन्होंने कहा, "हम बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान का पालन करते हैं।"

अशोक ने बिदादी टाउनशिप परियोजना और एनआईसीई जैसे मुद्दों के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की बात कही और कहा कि इन्हें विधानसभा के अगले सत्र में उठाया जाएगा। उन्होंने यह भी शिकायत की कि विपक्ष का नेता होने के बावजूद उन्हें अभी तक आवास आवंटित नहीं किया गया है।

सूखा राहत पर भी उठाए सवाल

राज्य में सूखे की स्थिति पर बात करते हुए आर. अशोक ने सरकार की घोषणा को महज एक औपचारिकता बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने स्थिति बिगड़ने के चार महीने बाद सूखा घोषित किया, जिसकी तुलना उन्होंने "किले के लूटे जाने के बाद उसके द्वार बंद करने" से की।

उन्होंने मांग की कि सरकार को 175 तालुकों में सूखा घोषित करना चाहिए और जारी की जा रही धनराशि पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने कहा, "धन की कमी के कारण यह संख्या कम कर दी गई है। प्रति तालुका केवल 1 करोड़ रुपए ही दिए गए हैं। 50,000 रुपए प्रति एकड़ के मुआवजे की हमारी मांग पर विचार नहीं किया गया है।"

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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