कर्नाटक: आदिवासी कल्याण घोटाले पर घिरी सरकार, मंत्री नागेंद्र को हटाने के लिए BJP-JDS ने खोला मोर्चा
कर्नाटक में कथित आदिवासी कल्याण घोटाले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) (JDS) ने एकजुट होकर मंत्री बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की…
कर्नाटक में कथित आदिवासी कल्याण घोटाले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) (JDS) ने एकजुट होकर मंत्री बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है और ऐलान किया है कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दोनों विपक्षी दलों ने विधानसभा सत्र के दौरान सरकार के खिलाफ संयुक्त आंदोलन छेड़ने का भी फैसला किया है।
यह पूरा विवाद कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड में हुए कथित घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के कल्याण के लिए आवंटित करीब 89 से 94 करोड़ रुपये की रकम फर्जी खातों के जरिए अवैध रूप से निकाल ली गई। यह मामला मई 2024 में तब सामने आया जब निगम के एक लेखा अधीक्षक ने आत्महत्या कर ली और अपने सुसाइड नोट में इस अवैध फंड ट्रांसफर का जिक्र किया था, जिसके बाद तत्कालीन आदिवासी कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र को इस्तीफा देना पड़ा था।
संयुक्त आंदोलन की घोषणा
नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने मंगलवार को विधान सौध में राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “यह कर्नाटक की भ्रष्ट सरकार है। जब तक इस भ्रष्ट सरकार को हटाया नहीं जाता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।” अशोक ने स्पष्ट किया कि विपक्ष दो प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन करेगा - मंत्री नागेंद्र की बर्खास्तगी और 184 करोड़ रुपये की सरकारी खजाने में वापसी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब नागेंद्र के खिलाफ ईडी और सीबीआई में मामले दर्ज हैं और चार्जशीट में उनका नाम है, तो उन्हें मंत्रिमंडल में क्यों शामिल किया गया।
JDS विधायक एच.डी. रेवन्ना ने भी इस संयुक्त मोर्चे की पुष्टि की। उन्होंने कहा, “हमने संयुक्त आंदोलन करने को लेकर चर्चा की है। भाजपा नेताओं ने विरोध को लेकर जो बात कही है, हम उससे सहमत हैं। हम बैठक करेंगे और सरकार का एकजुट होकर विरोध करने की रणनीति तय करेंगे।”
सरकार पर बढ़ा दबाव
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मांग की कि वह विधानसभा में बहस का इंतजार किए बिना नागेंद्र को तत्काल हटाएं। उन्होंने कहा, “अगर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को इन मुद्दों की चिंता है तो उन्हें सदन में इन पर चर्चा करने देनी चाहिए। समय बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए।” विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री के उस रुख पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि कार्रवाई से पहले इस मुद्दे पर सदन में चर्चा होगी। उन्होंने याद दिलाया कि जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे, तब चर्चा और बहस के बाद ही नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाया गया था, इसलिए अब इस पर बहस के लिए कुछ नहीं बचा है।
इनपुट: IANS



