वाल्मीकि निगम घोटाला: मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा, बोले- दलित होने के कारण मुझे निशाना बनाया जा रहा
कर्नाटक के बहुचर्चित वाल्मीकि जनजातीय कल्याण निगम घोटाले के विवाद के बीच राज्य के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने…
कर्नाटक के बहुचर्चित वाल्मीकि जनजातीय कल्याण निगम घोटाले के विवाद के बीच राज्य के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने स्वेच्छा से लिया है ताकि उनकी वजह से कांग्रेस पार्टी और सरकार को किसी असहज स्थिति का सामना न करना पड़े। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को बेंगलुरु के विधान सौधा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नागेंद्र भावुक हो गए और उन्होंने खुद को निर्दोष बताया।
अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए नागेंद्र ने कहा, "मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुझे बताया कि मैं हर स्तर पर निर्दोष हूं। उन्होंने कहा कि मुझे इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है। लेकिन पार्टी को किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए मैं स्वेच्छा से अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को सौंप रहा हूं।" उन्होंने यह भी कहा कि वह नहीं चाहते कि इस विवाद का असर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे या मुख्यमंत्री के विकास कार्यों पर पड़े।
विपक्ष पर निशाना और दलित पहचान का सवाल
नागेंद्र ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अन्य विपक्षी दलों पर उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मुझे ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? क्या इसलिए कि मैं दलित या आदिवासी हूं?" उन्होंने रामायण के शंबूक प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि आज भेदभाव की कोई जगह नहीं है, क्योंकि संविधान सभी को अधिकार देता है। मंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा की "मनुस्मृति की सोच" दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को सत्ता में आगे बढ़ते नहीं देखना चाहती।
उन्होंने अपनी बेगुनाही पर जोर देते हुए कई सवाल उठाए। "क्या मैंने कहीं कोई हस्ताक्षर किए? क्या मैंने कोई आदेश जारी किया? क्या मेरे पास से एक रुपया भी बरामद हुआ?" नागेंद्र ने तर्क दिया कि अगर उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है तो केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि घोटाला यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से जुड़ा है, जो केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन आता है।
जांच और कानूनी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मंत्री ने बताया कि इस मामले में कई जांच हो चुकी हैं और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था, जिसके बाद वह तीन महीने जेल में रहे और फिर जमानत पर बाहर आए। उन्होंने राज्य की जांच एजेंसियों पर भरोसा जताते हुए कहा, "भाजपा सीआईडी और एसआईटी का मजाक उड़ाती है, लेकिन हमें अपनी एसआईटी पर गर्व है।" उन्होंने अपने खिलाफ मुकदमा चलाने की राज्यपाल की मंजूरी पर भी सवाल उठाया और कहा कि केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के खिलाफ भी ऐसा ही मामला लंबित है, लेकिन कार्रवाई में दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है।
नागेंद्र ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि उनके इस्तीफे की मांग को लेकर सदन की कार्यवाही बाधित की गई, जिससे सूखा, कावेरी जल विवाद और केपीएससी भर्ती जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि वह अब जनता के बीच जाकर और कांग्रेस हाईकमान के सामने अपनी बात रखेंगे।
इनपुट: IANS



