बी नागेंद्र का इस्तीफा आदिवासी न्याय की जीत, भ्रष्टाचार के खिलाफ BJP का संघर्ष सफल: पोंगुलेटी सुधाकर रेड्डी
कर्नाटक के मंत्री बी नागेंद्र के इस्तीफे को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी एक बड़ी जीत बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय सह-प्रभारी डॉ. पोंगुलेटी सुधाकर रेड्डी ने इस इस्तीफे को आदिवासी न्याय और…
कर्नाटक के मंत्री बी नागेंद्र के इस्तीफे को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी एक बड़ी जीत बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय सह-प्रभारी डॉ. पोंगुलेटी सुधाकर रेड्डी ने इस इस्तीफे को आदिवासी न्याय और सार्वजनिक जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने दावा किया कि यह कर्नाटक भाजपा द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे निरंतर संघर्ष का परिणाम है।
यह पूरा मामला कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। डॉ. रेड्डी ने इस प्रकरण को बेहद गंभीर बताया, खासकर इसलिए क्योंकि इससे जुड़े घटनाक्रम में एक अधिकारी ने आत्महत्या तक कर ली थी। उनके मुताबिक, यह मामला किसी एक मंत्री के पद पर बने रहने से कहीं बड़ा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर अनुसूचित जनजाति समुदाय के कल्याण और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए आवंटित धन से संबंधित था।
भाजपा का सरकार पर लगातार दबाव
शुक्रवार को जारी एक बयान में तेलंगाना के पूर्व एमएलसी डॉ. रेड्डी ने कहा कि जब आदिवासी कल्याण कोष से जुड़े इतने गंभीर आरोप जांच के दायरे में हों, तो कोई भी जिम्मेदार राजनीतिक दल चुप नहीं बैठ सकता। उन्होंने कहा, "यह कोई सामान्य व्यावसायिक धन नहीं था, बल्कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के आर्थिक विकास के लिए बनाई गई एक सार्वजनिक संस्था का धन था।" भाजपा नेता के अनुसार, इस निगम से दुरुपयोग की गई हर राशि आदिवासी परिवारों, युवाओं और महिलाओं के अवसरों को प्रभावित करती है।
डॉ. रेड्डी ने बताया कि भाजपा ने इस मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए लगातार दबाव बनाए रखा। उन्होंने इसके लिए कर्नाटक भाजपा के नेतृत्व, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा, "कर्नाटक भाजपा ने दिखाया कि एक सतर्क विपक्ष की भूमिका क्या होती है।"
सदन से लेकर सड़क तक विरोध
भाजपा नेता ने दावा किया कि पार्टी के विधायकों ने विधानसभा में और सदस्यों ने विधान परिषद में इस लड़ाई को लगातार जारी रखा। उनके अनुसार, विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के कारण सरकार को उन सवालों का सामना करना पड़ा जिनसे वह बच रही थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि विपक्ष के लगातार विरोध और जवाबदेही की मांग के कारण ही कर्नाटक विधानसभा के मानसून सत्र को निर्धारित समय से तीन दिन पहले ही समाप्त करना पड़ा।
डॉ. सुधाकर रेड्डी ने स्पष्ट किया कि बी नागेंद्र का इस्तीफा सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के अधिकारों और सरकारी जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आने तक अपना आंदोलन जारी रखेगी।
इनपुट: IANS



