घर या ऑफिस खरीदने से पहले ही जानिए नेटवर्क कैसा है? TRAI ने लॉन्च किया डिजिटल रेटिंग प्लेटफॉर्म
अब आप कोई भी घर या ऑफिस खरीदने या किराए पर लेने से पहले ही वहां की इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की क्वालिटी जांच सकते हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने एक नया 'डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग'…
अब आप कोई भी घर या ऑफिस खरीदने या किराए पर लेने से पहले ही वहां की इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की क्वालिटी जांच सकते हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने एक नया 'डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग' (DCR) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जो किसी भी प्रॉपर्टी की डिजिटल कनेक्टिविटी के बारे में भरोसेमंद और पारदर्शी जानकारी देगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इसके साथ एक मोबाइल ऐप भी जारी किया गया है, जिससे रेटिंग की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
इस नई व्यवस्था का सीधा फायदा आम लोगों को होगा। वे किसी भी संपत्ति को खरीदने या किराए पर लेने का फैसला करने से पहले यह जान पाएंगे कि वहां कॉलिंग, डेटा डाउनलोडिंग और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के लिए नेटवर्क कैसा है। इस प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ता उन सभी प्रॉपर्टी की रेटिंग देख सकेंगे, जिन्हें आधिकारिक तौर पर रेट किया गया है।
कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?
यह प्लेटफॉर्म प्रॉपर्टी मैनेजर, रेटिंग करने वाली एजेंसियों और उपभोक्ताओं को एक ही जगह पर लाता है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनती है। उपभोक्ता किसी भी रेटेड प्रॉपर्टी को उसके नाम, सर्टिफिकेट आईडी या लोकेशन से खोज सकते हैं। उन्हें प्रॉपर्टी का डिजिटल रूप से सत्यापित रेटिंग सर्टिफिकेट देखने को मिलेगा, जिसकी प्रामाणिकता QR कोड स्कैन करके भी जांची जा सकती है।
ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा, "रेटिंग को सार्वजनिक करने और प्रमाणपत्रों के सत्यापन की सुविधा देने से उपभोक्ताओं को विश्वसनीय और तुलनात्मक जानकारी मिलेगी।" उन्होंने यह भी कहा कि इससे प्रॉपर्टी डेवलपर्स को प्रोजेक्ट की शुरुआत से ही अच्छी डिजिटल कनेक्टिविटी देने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
रेटिंग की प्रक्रिया और ऐप की भूमिका
पंजीकृत 'डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग एजेंसियां' (DCRA) इस प्लेटफॉर्म के जरिए रेटिंग के आवेदनों पर काम करेंगी। वे संपत्तियों का निरीक्षण करेंगी और टेस्ट के नतीजे दर्ज करेंगी।
ट्राई ने इस काम के लिए एक विशेष 'डीसीआरए मोबाइल ऐप' भी तैयार किया है। इसके माध्यम से अधिकृत एजेंसियां इमारतों के अंदर जाकर तय मानकों के अनुसार डिजिटल कनेक्टिविटी की जांच करेंगी और माप का डेटा सीधे सिस्टम पर अपलोड कर देंगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से डिजिटल कनेक्टिविटी किसी भी संपत्ति की एक स्पष्ट और सत्यापन योग्य विशेषता बन जाएगी।
इनपुट: IANS



