उत्तर कोरिया पर बढ़ा दबाव: अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए बातचीत की पेशकश की
कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्थापित करने के प्रयासों के तहत अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है। न्यूयॉर्क में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में तीनों…
कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्थापित करने के प्रयासों के तहत अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है। न्यूयॉर्क में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में तीनों देशों के शीर्ष राजनयिकों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह त्रिपक्षीय बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के आयोजन के दौरान हुई।
बैठक में दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी शामिल हुए। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया, "बातचीत का रास्ता खुला है और उत्तर कोरिया को बातचीत की मेज पर लौटना चाहिए।" तीनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि वे उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को मिलने वाले धन को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों को पूरी तरह लागू करेंगे।
क्षेत्रीय सुरक्षा और अन्य वैश्विक मुद्दे
इस मुलाकात में सिर्फ उत्तर कोरिया ही नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े कई अन्य अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। तीनों देशों ने ताइवान स्ट्रेट में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और यथास्थिति को एकतरफा बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध किया। इसके अलावा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता को बनाए रखने का भी समर्थन किया गया।
यह अपील ऐसे समय में की गई है जब उत्तर कोरिया लगातार अपने हथियार कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहा है। हाल ही में उसने नेता किम जोंग-उन की मौजूदगी में एक नए हथियार तंत्र के परीक्षण की जानकारी दी थी। वहीं, अमेरिका ने प्योंगयांग के साथ बातचीत की संभावना खुली रखते हुए भी दक्षिण कोरिया और जापान की रक्षा के प्रति अपनी ‘आयरनक्लैड’ प्रतिबद्धता दोहराई है। बयान के अनुसार, अमेरिका ने कहा कि यह प्रतिबद्धता उसकी सैन्य क्षमता और परमाणु क्षमताओं से स्वीकृत है।
आर्थिक और तकनीकी सहयोग पर सहमति
राजनयिकों ने आर्थिक सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करने और साइबर खतरों से निपटने जैसे विषयों पर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित रखने और पारदर्शी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक और जैव प्रौद्योगिकी जैसी उभरती तकनीकों के विकास और सुरक्षा के लिए सहयोग को और मज़बूत करने पर भी सहमति बनी।
इनपुट: IANS



