कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु के किसान राष्ट्रपति से मिलेंगे, कर्नाटक से 1 लाख करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग
तमिलनाडु के किसानों का एक संगठन कावेरी जल विवाद के मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करने की तैयारी कर रहा है। किसानों ने कर्नाटक सरकार पर कावेरी नदी का पानी नहीं छोड़ने का आरोप लगाया…
तमिलनाडु के किसानों का एक संगठन कावेरी जल विवाद के मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करने की तैयारी कर रहा है। किसानों ने कर्नाटक सरकार पर कावेरी नदी का पानी नहीं छोड़ने का आरोप लगाया है, जिसके कारण राज्य में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, किसान इस मामले में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
नेशनल साउथ इंडियन रिवर्स इंटरलिंकिंग फार्मर्स एसोसिएशन ने 4 सितंबर को दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने का समय मांगा है। संगठन के राज्य अध्यक्ष पी. अय्याकन्नू ने कहा कि वे राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपकर कर्नाटक सरकार से 1 लाख करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाने की मांग करेंगे।
क्षतिपूर्ति और किसानों की चिंता
पी. अय्याकन्नू ने कहा, "संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, तमिलनाडु हर महीने कर्नाटक को (कावेरी नदी का) पानी देता है, लेकिन कर्नाटक ऐसा करने से इनकार कर देता है। नतीजतन, सूखे से सभी बड़े, छोटे और सीमांत किसान प्रभावित हो रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "हमने राष्ट्रपति से मिलने की अनुमति के लिए पहले ही एक पत्र भेज दिया है... तमिलनाडु के किसानों को आत्महत्या करने से रोकने के लिए उन्हें मुआवजा दिया जाना चाहिए।"
जलाशयों में पानी का संकट
यह विवाद ऐसे समय में गरमाया है जब तमिलनाडु के जलाशय पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और असामान्य रूप से बढ़े तापमान ने राज्य के जल संसाधनों पर गहरा दबाव डाला है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार तक राज्य के 90 प्रमुख जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का केवल 37.05 प्रतिशत पानी ही बचा था। इन जलाशयों की कुल क्षमता 224.343 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMCFT) है, जबकि उनमें सिर्फ 83.124 TMCFT पानी उपलब्ध है।
यह स्थिति पिछले साल की तुलना में बेहद चिंताजनक है, जब इसी अवधि में इन जलाशयों में 189.545 TMCFT पानी था। कावेरी डेल्टा में सिंचाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले मेट्टूर जलाशय में भी उसकी कुल क्षमता का 46.30 प्रतिशत ही पानी है। 90 में से 58 जलाशयों में तो 25 प्रतिशत से भी कम पानी बचा है, जिससे सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इनपुट: IANS



