दिल्ली बिल्डिंग हादसा: मलबे में दबे छात्र ने सुनाई आपबीती, 'मुझे लगा मेरा पैर कट जाएगा'
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए इमारत हादसे में जीवित बचे एक छात्र ने मलबे के नीचे घंटों तक फंसे रहने के उस खौफनाक अनुभव को साझा किया है। जम्मू के रहने वाले नीतीश ने बताया कि एक समय उन्हें लगा कि…
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए इमारत हादसे में जीवित बचे एक छात्र ने मलबे के नीचे घंटों तक फंसे रहने के उस खौफनाक अनुभव को साझा किया है। जम्मू के रहने वाले नीतीश ने बताया कि एक समय उन्हें लगा कि बचाव के दौरान उनका पैर काटना पड़ सकता है।
समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज के छात्र नीतीश ने उन भयानक पलों को याद किया। उन्होंने बताया, "जब इमारत गिरी, तो मैं अपने एक दोस्त नीरज के साथ उसके कमरे में बैठा था। यह सब इतनी अचानक हुआ कि हमें संभलने का मौका ही नहीं मिला।" उस वक्त इमारत में करीब नौ से दस छात्र मौजूद थे और बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था।
मदद के लिए एक फोन कॉल
नीतीश ने बताया कि मलबे के नीचे दबे होने के दौरान उनके पास फोन नहीं था, लेकिन सौभाग्य से पास में फंसे एक अन्य लड़के के पास था। उन्होंने बताया, "उस लड़के ने अपने सीनियर्स को फोन किया और उन्हें हमारी लोकेशन भेजी।" इसके बाद सीनियर्स मौके पर पहुंचे और बचाव दल को उनकी सटीक जगह की जानकारी दी, जिससे बचाव कार्य शुरू हो सका।
बचाव अभियान घंटों तक चला। नीतीश ने कहा, "मेरे शरीर का ऊपरी हिस्सा तो निकाल लिया गया, लेकिन मेरा एक पैर मलबे में बुरी तरह फंसा रहा। उसे निकालने में बहुत समय लगा। मुझे तो लगा कि मेरा पैर कट जाएगा, लेकिन शुक्र है कि ऐसा नहीं हुआ।" उन्होंने यह भी बताया कि एक समय उन्हें बचने की कोई उम्मीद नहीं रही थी, क्योंकि कुछ लोग कह रहे थे कि बगल की इमारत भी गिर सकती है।
परिवार का दर्द और प्रशासन से अपील
नीतीश की मां ने बताया कि उन्हें इस हादसे की खबर नीतीश के एक दोस्त के संदेश से मिली। उन्होंने कहा, "जब तक मैंने उसे अस्पताल में अपनी आँखों से नहीं देख लिया, मुझे चैन नहीं मिला।" उन्होंने बताया कि जब वे अस्पताल पहुंचे, तो तीन छात्रों की मौत हो चुकी थी और उनकी लाशें देखकर वह सदमे में आ गईं।
नीतीश के अनुसार, उनके फ्लैटमेट नीरज की दो सर्जरी हो चुकी हैं और वह अब ठीक हो रहे हैं। छात्र ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात का भी जिक्र किया, जिन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया। नीतीश ने अधिकारियों से अपील की, "पुरानी इमारतों की हालत पर नजर रखी जानी चाहिए। जो हमारे साथ हुआ, वह दोबारा नहीं होना चाहिए।"
इनपुट: IANS



