शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भारत का दो टूक जवाब: आतंकवाद को शह देने वाले पाकिस्तान को हमारे आंतरिक मामलों में दखल का हक़ नहीं

भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान पर आतंकवाद को अपनी 'राजकीय नीति' के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कड़ी फटकार लगाई है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने…

भारत का दो टूक जवाब: आतंकवाद को शह देने वाले पाकिस्तान को हमारे आंतरिक मामलों में दखल का हक़ नहीं
(फोटो: IANS)

भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान पर आतंकवाद को अपनी 'राजकीय नीति' के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कड़ी फटकार लगाई है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान को कोई अधिकार नहीं है, खासकर जब उसका सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का दशकों पुराना इतिहास रहा हो। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह टिप्पणी हुर्रियत नेताओं के समर्थन में पाकिस्तानी बयानों पर आई है।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, "पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।" उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद को पाकिस्तान का दशकों पुराना समर्थन और मदद जगजाहिर है, जिसे वह लगातार अपनी राज्य नीति के एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है।

पहलगाम आतंकी हमला

ब्रीफिंग में पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले का भी ज़िक्र हुआ, जिसकी जाँच अभी जारी है। जायसवाल ने कहा, "पहलगाम आतंकी हमले में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई। आप सभी ने उस हमले की भयावहता देखी है। हमारी जांच एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं और यह अभी जारी है।"

यह हमला 22 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने किया था। आतंकियों ने गैर-मुस्लिमों की पहचान के लिए कुछ लोगों से इस्लामिक कलमा पढ़ने को कहा था और फिर पीड़ितों का धर्म पूछकर उन्हें निशाना बनाया था। इस बर्बर हमले में 25 पर्यटकों और उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे एक स्थानीय घोड़े वाले की मौत हो गई थी। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के एक संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) ने ली थी।

अलगाववादी नेताओं पर NIA का शिकंजा

यह मामला हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के छह वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दाखिल चार्जशीट से जुड़ा है। 10 जुलाई को एनआईए ने 1996 में श्रीनगर में हुई हिंसा के एक मामले में शब्बीर अहमद शाह समेत छह अलगाववादी नेताओं पर आरोपपत्र दाखिल किया था।

यह आरोपपत्र श्रीनगर में भीड़ द्वारा की गई हिंसा और पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध गोलीबारी से संबंधित है। चार्जशीट में शब्बीर अहमद शाह, सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन, मोहम्मद याकूब वकील, जावेद अहमद मीर और शकील अहमद बख्शी के नाम हैं। इन सभी पर आपराधिक साजिश, हत्या की कोशिश, दंगा और सरकारी कर्मचारियों पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। साथ ही गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 13 भी लगाई गई है।

एनआईए की जाँच के मुताबिक, इन छहों ने 17 जुलाई, 1996 को श्रीनगर के नाज क्रॉसिंग इलाके में मारे गए आतंकी हिलाल अहमद बेग के जनाजे के दौरान भीड़ का नेतृत्व किया था और हिंसा भड़काई थी। सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन और मोहम्मद याकूब वकील की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी, लेकिन चार्जशीट में साजिश और हिंसा में उनकी भूमिका का जिक्र किया गया है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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