शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक वाहनों का दौर: 22,500 मैकेनिकों को मिलेगी खास ट्रेनिंग, सरकार ने आवंटित किए 3 करोड़ रुपये

तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ी कौशल विकास पहल शुरू की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस कार्यक्रम का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 22,500…

तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक वाहनों का दौर: 22,500 मैकेनिकों को मिलेगी खास ट्रेनिंग, सरकार ने आवंटित किए 3 करोड़ रुपये
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ी कौशल विकास पहल शुरू की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस कार्यक्रम का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 22,500 लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की सर्विसिंग और मरम्मत के लिए प्रशिक्षित करना है। इस योजना में सड़क किनारे काम करने वाले 12,500 दोपहिया और चार पहिया मैकेनिक भी शामिल होंगे।

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यह पहल राज्य के पारंपरिक ऑटोमोबाइल वर्कफोर्स को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के नए युग के लिए तैयार करने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है। 2026-27 के संशोधित बजट में घोषित इस योजना के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में 3 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसका उद्देश्य पेट्रोल और डीजल गाड़ियों पर निर्भर मैकेनिकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है ताकि वे इलेक्ट्रिक वाहनों और उनके बैटरी सिस्टम का रखरखाव कर सकें।

प्रशिक्षण की जरूरत क्यों पड़ी?

श्रम विभाग के सूत्रों ने बताया कि यह प्रस्ताव तब तैयार किया गया जब पारंपरिक ऑटोमोबाइल मैकेनिकों ने बजट-पूर्व बैठक में श्रम और कौशल विकास मंत्री जे. मोहम्मद फरवास के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने मांग की थी कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी से हो रहे बदलावों को देखते हुए उन्हें विशेष ट्रेनिंग दी जाए, क्योंकि इलेक्ट्रिक गाड़ियां अब आम होती जा रही हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, सड़क किनारे काम करने वाले मैकेनिकों को पारंपरिक इंजन वाले वाहनों का काफी अनुभव होता है, लेकिन उनके पास ईवी तकनीक की औपचारिक ट्रेनिंग की कमी है। इलेक्ट्रिक वाहनों की सर्विसिंग के लिए बैटरी पैक, इलेक्ट्रिक मोटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-वोल्टेज कंपोनेंट्स जैसे खास कौशल की आवश्यकता होती है।

कोर्स में क्या सिखाया जाएगा?

प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम में ईवी सर्विसिंग, बैटरी की देखभाल, खराबी का पता लगाना, सुरक्षा प्रक्रियाओं और आधुनिक डायग्नोस्टिक उपकरणों के इस्तेमाल पर व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिकल सिस्टम को सुरक्षित रूप से संभालने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

फिलहाल श्रम विभाग इन कोर्स को डिजाइन और संचालित करने के लिए एक पेशेवर ट्रेनिंग पार्टनर चुनने की प्रक्रिया में है। योजना के औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले योग्यता, कोर्स की अवधि और ट्रेनिंग सेंटरों के बारे में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। यह कार्यक्रम सत्ताधारी दल TVK के चुनावी घोषणापत्र के भी अनुरूप है, जिसमें पारंपरिक मैकेनिकों को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता का वादा किया गया था।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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