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तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में AI और रोबोटिक्स की पढ़ाई, 60 लाख छात्रों को मिलेगा फायदा

तमिलनाडु के 60 लाख से ज़्यादा छात्र जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और कोडिंग जैसी भविष्य की टेक्नोलॉजी के बारे में सीखेंगे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य सरकार ने अपने सभी…

तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में AI और रोबोटिक्स की पढ़ाई, 60 लाख छात्रों को मिलेगा फायदा
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु के 60 लाख से ज़्यादा छात्र जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और कोडिंग जैसी भविष्य की टेक्नोलॉजी के बारे में सीखेंगे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य सरकार ने अपने सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के लिए 'इमर्जिंग टेक्नोलॉजी' यानी उभरती प्रौद्योगिकी पर एक नया पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य छात्रों को डिजिटल दुनिया की ज़रूरतों के लिए तैयार करना है।

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यह पहल पारंपरिक कंप्यूटर शिक्षा से एक कदम आगे है। इसमें थ्योरी के बजाय प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट-आधारित सीखने पर ज़ोर दिया जाएगा, ताकि छात्र वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर सकें। इस प्रस्ताव पर हाल ही में चेन्नई में स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति की बैठक में चर्चा हुई।

कैसा होगा नया पाठ्यक्रम?

पाठ्यक्रम को हर कक्षा के स्तर के हिसाब से डिज़ाइन किया गया है। कक्षा 6 के छात्र डिजिटल जागरूकता से शुरुआत करेंगे, 7वीं के छात्र नई तकनीकों की बुनियादी बातें सीखेंगे, और 8वीं में वे प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट पर काम करेंगे। आगे चलकर, कक्षा 9 और 10 का सिलेबस वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर केंद्रित होगा।

स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) ने कक्षा 6 से 8 के लिए द्विभाषी पाठ्यपुस्तकें तैयार कर ली हैं। अगले शैक्षणिक वर्ष तक 9वीं और 10वीं के लिए, और उसके बाद 11वीं और 12वीं के लिए किताबें लाने की योजना है।

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता

यह योजना 'तमिलनाडु स्कूल्स प्रोग्राम फॉर एआई, रोबोटिक्स एंड नॉलेज ऑफ ऑनलाइन टूल्स' के तहत पहले से ही लगभग 5,000 सरकारी स्कूलों में पायलट आधार पर चल रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इसके अच्छे नतीजों को देखते हुए अब इसे सभी सरकारी स्कूलों में लागू किया जा रहा है।

स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव बी. चंद्र मोहन ने बताया कि सरकार कक्षा 11 और 12 के लिए इस पाठ्यक्रम को एक वैकल्पिक विषय के रूप में पेश करने पर भी विचार कर रही है। पाठ्यक्रम में छात्रों को जेनरेटिव एआई, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और लार्ज लैंग्वेज मॉडल जैसे उन्नत विषयों से भी परिचित कराया जाएगा। साथ ही, उन्हें जियोजेब्रा और गूगल अर्थ जैसे कई एजुकेशनल टूल्स पर प्रैक्टिकल अनुभव भी मिलेगा। इस विषय को पढ़ाने के लिए गणित और विज्ञान के शिक्षकों को एससीईआरटी द्वारा विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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