नेपाल बाढ़: तमिलनाडु के 37 तीर्थयात्रियों का अब भी पता नहीं, विधानसभा में सरकार से जवाब तलब
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 37 तीर्थयात्रियों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है, जिससे उनके परिजन चिंतित हैं। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस गंभीर…
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 37 तीर्थयात्रियों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है, जिससे उनके परिजन चिंतित हैं। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस गंभीर मुद्दे को लेकर गुरुवार को तमिलनाडु विधानसभा में सदस्यों ने सरकार से लापता लोगों की स्थिति और बचाव कार्यों पर विस्तृत जानकारी की मांग की।
यह मामला उस समय उठा जब टीवीके सरकार के सत्ता में आने के बाद पहली बार प्रश्नकाल का आयोजन किया गया। विधायकों ने फंसे हुए तीर्थयात्रियों के बारे में कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए, जिनमें एक उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवगणनम के भी शामिल होने की बात कही गई है।
विधायकों ने पूछे ये अहम सवाल
सदन में सदस्यों ने सरकार से पूछा कि क्या बचाव अभियान में तालमेल के लिए किसी विशेष अधिकारी को नियुक्त किया गया है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि राज्य सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबरों पर अब तक कितनी कॉल्स आई हैं और कितने लोग अब भी नेपाल में फंसे हुए हैं। विधायकों ने इस बात पर जोर दिया कि फंसे हुए लोगों के परिवार उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
ये सभी श्रद्धालु तंजावुर जिले के कुंभकोणम स्थित एक निजी टूर ऑपरेटर ‘सुपर यात्रा ट्रैवल्स’ के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ के बाद कुल 500 पर्यटकों से संपर्क टूट गया था, जिनमें 133 भारतीय और भारतीय मूल के 37 प्रवासी नागरिक शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार, इन फंसे हुए भारतीयों में से 57 लोग तमिलनाडु के थे।
सूत्रों का कहना है कि इस समूह के 20 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन शेष 37 तीर्थयात्रियों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई है। इसी अनिश्चितता को लेकर विधानसभा ने सरकार से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की है।
विधानसभा सत्र की पृष्ठभूमि
तमिलनाडु विधानसभा का यह सत्र गुरुवार सुबह 9:30 बजे फिर से शुरू हुआ। इससे पहले 5 अगस्त को आम बजट और 6 अगस्त को कृषि बजट पेश किया गया था, जिस पर 11 अगस्त तक चर्चा चली। 17 अगस्त से विभिन्न विभागों के लिए अनुदान मांगों पर चर्चा हो रही है और अब तक 27 विभागों से संबंधित बहस पूरी हो चुकी है।
इनपुट: IANS



