चीन का बढ़ता खतरा: ताइवान की सुरक्षा के लिए जापान के साथ मजबूत सैन्य साझेदारी क्यों जरूरी?
चीन की तरफ से बढ़ते सैन्य दबाव और कब्जे की आशंकाओं के बीच ताइवान अपनी सुरक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव लाने पर विचार कर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान अब दूर बैठे सहयोगियों पर निर्भर रहने के…
चीन की तरफ से बढ़ते सैन्य दबाव और कब्जे की आशंकाओं के बीच ताइवान अपनी सुरक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव लाने पर विचार कर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान अब दूर बैठे सहयोगियों पर निर्भर रहने के बजाय अपने सबसे करीबी और सक्षम पड़ोसी जापान के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। समाचार एजेंसी IANS ने यूरोपियन टाइम्स में प्रकाशित एक लेख के हवाले से यह जानकारी दी है, जिसमें इस रणनीतिक बदलाव की अहमियत पर प्रकाश डाला गया है।
यह लेख तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के भतीजे खेदरूब थोंडुप ने लिखा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि ताइवान का अस्तित्व सिर्फ उसकी अपनी सैन्य क्षमता पर ही नहीं, बल्कि उसके सहयोगियों की ताकत पर भी निर्भर करता है।
जापान ही क्यों है सबसे अहम साझेदार?
रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान के संभावित सहयोगियों में जापान कई कारणों से सबसे उपयुक्त है। दोनों देश भौगोलिक रूप से बेहद करीब हैं, जापान सैन्य रूप से सक्षम है और दोनों ही समान सोच वाले लोकतांत्रिक देश हैं। थोंडुप ने लिखा, "संभावित साझेदारों में, जापान सबसे करीबी, काबिल और राजनीतिक रूप से जुड़ा पक्ष है, इसलिए सिर्फ सांकेतिक नहीं बल्कि एक स्ट्रेटेजिक जरूरत के तौर पर भी ताइवान को जापान के साथ अपने रक्षा संबंधों को और समृद्ध करना चाहिए।"
आपसी सुरक्षा और भौगोलिक जुड़ाव
दोनों देशों की सुरक्षा एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है। जापान के क्यूशू द्वीप से ताइवान तक फैली रयूक्यू द्वीप श्रृंखला किसी भी संभावित चीनी सैन्य हमले के रास्ते में आती है। अगर चीन ताइवान पर नियंत्रण कर लेता है, तो इससे जापान के दक्षिणी क्षेत्रों और उसकी महत्वपूर्ण समुद्री आपूर्ति लाइनों के लिए सीधा खतरा पैदा हो जाएगा। इसी तरह, अगर जापान कमजोर होता है, तो ताइवान रणनीतिक रूप से अकेला पड़ जाएगा।
सैन्य सहयोग बढ़ाने के सुझाव
इस रिपोर्ट में ताइवान और जापान के बीच रक्षा सहयोग को व्यावहारिक स्तर पर बढ़ाने के लिए कई ठोस सुझाव दिए गए हैं। इनमें नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास करना, चीन की सैन्य गतिविधियों पर खुफिया जानकारी साझा करना, और युद्ध की स्थिति में संयुक्त रसद व आकस्मिक योजनाओं पर काम करना शामिल है। साथ ही, एक ऐसे कानूनी ढांचे की भी जरूरत बताई गई है जो जरूरत पड़ने पर जापानी बलों को ताइवान की रक्षा में मदद करने की अनुमति दे। खेदरूब थोंडुप ने स्पष्ट किया, "ताइवान अब केवल दूरस्थ सहयोगियों पर निर्भर रहने का जोखिम नहीं उठा सकता। उसकी सुरक्षा जापान के साथ व्यावहारिक रक्षा साझेदारी पर टिकी है।"
चीन के कदमों पर ताइवान की प्रतिक्रिया
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब चीन लगातार ताइवान पर अपना दावा जता रहा है। पिछले महीने ही, ताइवान ने अपने पूर्वी समुद्री क्षेत्र में चीन के तटरक्षक बल द्वारा गश्त शुरू किए जाने की कड़ी निंदा की थी। ताइवान के मेनलैंड अफेयर्स काउंसिल (एमएसी) ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया था। एमएसी ने जोर देकर कहा कि चीन की ऐसी अवैध कार्रवाइयों को दोहराने से वे वैध नहीं हो जातीं और ताइवान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
इनपुट: IANS



