स्कारबोरो शोल विवाद: फिलीपींस के संयुक्त राष्ट्र में दावे के बाद ताइवान और चीन ने भी जताया अधिकार
दक्षिण चीन सागर में स्थित स्कारबोरो शोल पर फिलीपींस द्वारा संयुक्त राष्ट्र में अपना दावा पेश किए जाने के बाद ताइवान और चीन की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार…
दक्षिण चीन सागर में स्थित स्कारबोरो शोल पर फिलीपींस द्वारा संयुक्त राष्ट्र में अपना दावा पेश किए जाने के बाद ताइवान और चीन की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान ने इस क्षेत्र में अपने संप्रभुता के दावे को फिर से दोहराया है, वहीं चीन ने फिलीपींस के इस कदम को "गैरकानूनी और अमान्य" करार दिया है।
यह पूरा मामला तब गरमाया जब पिछले सप्ताह फिलीपींस ने स्कारबोरो शोल का एक आधिकारिक समुद्री नक्शा संयुक्त राष्ट्र (UN) को सौंपा। फिलीपींस के विदेश विभाग ने कहा कि यह कदम 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के तहत उठाया गया है, जिसके अनुसार तटीय देशों को अपने बेसलाइन नक्शे सार्वजनिक करने होते हैं। इन्हीं बेसलाइन से उनके क्षेत्रीय समुद्र की चौड़ाई मापी जाती है।
ताइवान और चीन की प्रतिक्रिया
फिलीपींस के इस कदम के जवाब में रविवार को ताइवान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया। सरकारी समाचार एजेंसी CNA के मुताबिक, ताइवान ने कहा कि दक्षिण चीन सागर के द्वीपों पर उसकी संप्रभुता है। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे किसी भी बहुपक्षीय विवाद के समाधान की प्रक्रिया में ताइवान को भी शामिल किया जाना चाहिए और सभी मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जाना चाहिए।
वहीं, चीन ने 31 जुलाई को फिलीपींस की कड़ी आलोचना की। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता का "गंभीर उल्लंघन" बताते हुए कहा कि यह कदम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और UNCLOS समेत अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। चीन ने कहा, "हुआंगयान दाओ (स्कारबोरो शोल का चीनी नाम) चीन का अभिन्न हिस्सा है और चीन इस कदम को कभी स्वीकार नहीं करेगा।"
विवादित क्षेत्र और विभिन्न नाम
स्कारबोरो शोल एक ऐसा एटोल (द्वीप) है जिस पर तीन देश अपना-अपना दावा करते हैं। फिलीपींस इसे 'बाजो डे मासिनलोक' कहता है, जबकि ताइवान में इसे 'डेमोक्रेसी रीफ' और चीन में 'हुआंगयान दाओ' के नाम से जाना जाता है।
चीन ने अपने बयान में यह भी तर्क दिया कि फिलीपींस की सीमाएं अंतरराष्ट्रीय संधियों द्वारा पहले ही तय हो चुकी हैं और यह शोल कभी भी उसका हिस्सा नहीं रहा, इसलिए मनीला का दावा "पूरी तरह बेबुनियाद" है। चीन ने यह भी कहा कि फिलीपींस द्वारा एकतरफा शुरू की गई 'साउथ चाइना सी आर्बिट्रेशन' भी अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है।
इनपुट: IANS



