गुरूवार, 23 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद: जीडीपी से जीएसटी तक, हर मोर्चे पर दिख रही बढ़त

वैश्विक स्तर पर कई तरह की अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए आर्थिक आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि देश की विकास यात्रा

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद: जीडीपी से जीएसटी तक, हर मोर्चे पर दिख रही बढ़त
(फोटो: IANS)

वैश्विक स्तर पर कई तरह की अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए आर्थिक आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि देश की विकास यात्रा सही राह पर है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत घरेलू मांग और निवेश के सकारात्मक माहौल के चलते अर्थव्यवस्था के लगभग सभी प्रमुख संकेतक बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

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वित्त वर्ष 2025-26 में भारत 7.7% की विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। साल की आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च) में यह रफ्तार और तेज होकर 7.8% पर पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि के 7% से कहीं ज्यादा है। इस तेज वृद्धि के पीछे विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों का अहम योगदान रहा।

औद्योगिक उत्पादन और निवेश में तेजी

औद्योगिक क्षेत्र के प्रदर्शन पर नजर डालें तो यहां भी लगातार विस्तार देखने को मिल रहा है। एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI जून 2026 में 54.2 पर रहा, जो लगातार 37वां महीना है जब यह 50-अंक के स्तर से ऊपर बना हुआ है। यह विनिर्माण गतिविधियों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का स्पष्ट संकेत है। इसी तरह, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) भी मई 2026 में बढ़कर 5.1% पर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का उच्चतम स्तर है।

निवेश के मोर्चे पर भी अच्छी खबर है। पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) के उत्पादन में 12.9% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है, जो औद्योगिक क्षमता में विस्तार का संकेत है। इसके अलावा, सरकार का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) भी तेजी से बढ़ रहा है। चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों (अप्रैल-मई 2026) में यह 2.51 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि से लगभग 29,650 करोड़ रुपए अधिक है।

राजस्व संग्रह और सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन

सरकार का राजस्व संग्रह भी मजबूत बना हुआ है। जून 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 13.9% बढ़कर करीब 1.95 लाख करोड़ रुपए हो गया। वहीं, 17 जून तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह भी 14.64% बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो एक स्थिर राजस्व आधार को दर्शाता है।

सेवा क्षेत्र, जो भारतीय अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है, वहां भी सकारात्मक रुझान जारी है। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज PMI मई 2026 में बढ़कर 59.8 पर पहुंच गया, जो नवंबर 2025 के बाद का सबसे तेज विस्तार है।

मांग और आर्थिक गतिविधियों के अन्य संकेतक

देश में आर्थिक गतिविधियों की मजबूती का एक और प्रमाण वाहन बिक्री के आंकड़ों में दिखता है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में वाहनों की बिक्री ने शानदार प्रदर्शन किया। खास तौर पर अप्रैल में 26.11 लाख वाहनों की खुदरा बिक्री हुई, जो किसी भी अप्रैल महीने का अब तक का रिकॉर्ड है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी मांग बनी हुई है, जहां मई में ऑटोमोबाइल बिक्री 7.8% बढ़ी।

इसके साथ ही, देश भर में वस्तुओं की आवाजाही को दर्शाने वाले ई-वे बिल की संख्या में भी मई के दौरान 10.9% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जो व्यापार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में मजबूती का संकेत है।

इनपुट: IANS

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