सोमवार, 17 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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रसोई गैस पर भारी घाटा: पहली तिमाही में क्यों दबाव में रहीं सरकारी तेल कंपनियां?

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए चुनौतीपूर्ण रही। रसोई गैस (LPG) की बिक्री पर हुए भारी नुकसान ने इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बनाया। समाचार एजेंसी…

रसोई गैस पर भारी घाटा: पहली तिमाही में क्यों दबाव में रहीं सरकारी तेल कंपनियां?
(फोटो: IANS)

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए चुनौतीपूर्ण रही। रसोई गैस (LPG) की बिक्री पर हुए भारी नुकसान ने इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बनाया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ी कीमतें और घरेलू बाज़ार में रियायती दरों पर सिलेंडर की बिक्री रही।

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केयरएज रेटिंग्स की एक विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की तीन प्रमुख तेल कंपनियों को इस तिमाही में LPG की बिक्री पर कुल मिलाकर लगभग 13,700 करोड़ रुपये का घाटा (अंडर-रिकवरी) हुआ। यह आंकड़ा सरकार से मिली 7,500 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति को समायोजित करने के बाद का है। कंपनियां घरेलू उपभोक्ताओं को बाज़ार भाव से कम कीमत पर सिलेंडर मुहैया कराती हैं, जिससे यह घाटा होता है।

घाटे की मुख्य वजह

रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 को तेल कंपनियों का कुल LPG अंडर-रिकवरी 48,200 करोड़ रुपये था, जो 30 जून 2026 तक बढ़कर 61,900 करोड़ रुपये हो गया। इस तेज बढ़ोतरी के पीछे पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने जैसे कारण रहे, जिनसे वैश्विक LPG सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई।

इसके परिणामस्वरूप, अंतरराष्ट्रीय LPG बेंचमार्क 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस' (सऊदी सीपी) में लगभग 50% की भारी उछाल आई। वित्त वर्ष 2025-26 में इसका औसत 530 डॉलर प्रति मीट्रिक टन था, जो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बढ़कर 785 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर पहुंच गया।

आयात और कीमतों पर असर

भारत अपनी LPG ज़रूरत का करीब 60% हिस्सा आयात करता है। पश्चिम एशिया से सप्लाई बाधित होने पर भारत ने अमेरिका और अन्य बाज़ारों से खरीद बढ़ाई, लेकिन वैकल्पिक स्रोतों से आयात करने के कारण कंपनियों की कुल लागत (लैंडेड कॉस्ट) में काफी वृद्धि हुई।

बढ़ती लागत का बोझ कम करने के लिए वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 89 रुपये की बढ़ोतरी भी की गई।

आगे क्या उम्मीद है?

हालांकि, जुलाई 2026 से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है। जुलाई में सऊदी सीपी घटकर 592 डॉलर और अगस्त में 632 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर आ गया। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि कीमतों में इस नरमी से कंपनियों की खरीद लागत कम होगी और वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में LPG अंडर-रिकवरी में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आ सकती है।

इनपुट: IANS

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