सोमवार, 17 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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RBI ने तारीख घटाई, फिर भी FCNR(B) डिपॉजिट से 80 अरब डॉलर से ज़्यादा की उम्मीद: रिपोर्ट

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत करने वाली एक अहम योजना में उम्मीद से कहीं ज़्यादा निवेश आ रहा है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से आई बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार…

RBI ने तारीख घटाई, फिर भी FCNR(B) डिपॉजिट से 80 अरब डॉलर से ज़्यादा की उम्मीद: रिपोर्ट
(फोटो: IANS)

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत करने वाली एक अहम योजना में उम्मीद से कहीं ज़्यादा निवेश आ रहा है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से आई बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिज़र्व बैंक के एक विशेष विंडो को जल्दी बंद करने के बावजूद, विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) यानी FCNR(B) जमा योजना के तहत कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह 80 अरब डॉलर का आँकड़ा पार कर सकता है।

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यह अनुमान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शुरुआत में इस योजना से लगभग 70 अरब डॉलर आने की उम्मीद थी। लेकिन योजना शुरू होने के बाद निवेशकों की ज़बरदस्त प्रतिक्रिया को देखते हुए बोफा ने अपना अनुमान बढ़ा दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है, "मजबूत प्रवाह को देखते हुए हमने अपने अनुमान को बढ़ाकर 80 अरब डॉलर से अधिक कर दिया है।"

समय से पहले बंद हो रही है विशेष सुविधा

दरअसल, RBI ने इस FCNR(B) जमा पर मिलने वाली शून्य-लागत हेजिंग (यानी मुद्रा के उतार-चढ़ाव से बचाव) सुविधा का लाभ उठाने की आख़िरी तारीख़ को घटा दिया है। पहले यह सुविधा 30 सितंबर तक उपलब्ध थी, लेकिन अब इसे 31 अगस्त को ही बंद कर दिया जाएगा। बोफा का मानना है कि अगर यह सुविधा सितंबर अंत तक जारी रहती, तो निवेश का आँकड़ा और भी ज़्यादा हो सकता था।

अब तक कितना निवेश आया?

तारीख घटाए जाने के बावजूद निवेश की रफ़्तार काफ़ी तेज़ बनी हुई है। रिपोर्ट के आँकड़ों के मुताबिक, सिर्फ़ 8 जून से 13 अगस्त के बीच बैंकों ने इस योजना के ज़रिए 52.3 अरब डॉलर जुटा लिए हैं। इसके अलावा, इसी अवधि में बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) के लिए स्वैप सुविधा से 1.7 अरब डॉलर और अधिकृत बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा उधारी से 2.8 अरब डॉलर भी प्राप्त हुए हैं।

अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा?

बोफा सिक्योरिटीज का मानना है कि यह विदेशी मुद्रा प्रवाह भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को मज़बूत करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। यह मज़बूती ऐसे समय में मिल रही है जब चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का चालू खाते का घाटा (CAD) बढ़कर 3.1 अरब डॉलर पर पहुँच गया था, जो जीडीपी का क़रीब 0.3 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, यह घाटा मुख्य रूप से माल व्यापार (Merchandise Trade) में बढ़े घाटे के कारण हुआ, हालाँकि सेवाओं के निर्यात और विदेश से भेजे गए पैसों (Remittances) ने इसे कुछ हद तक संभाला।

इनपुट: IANS

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