थूथुकुडी में एक और हिरासत में मौत, DMK अध्यक्ष स्टालिन ने सीएम विजय से मांगी जवाबदेही
तमिलनाडु के थूथुकुडी में पुलिस हिरासत में हुई 24 वर्षीय युवक की मौत ने राज्य में एक बार फिर राजनीतिक भूचाल ला दिया है। इस घटना को लेकर DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार…
तमिलनाडु के थूथुकुडी में पुलिस हिरासत में हुई 24 वर्षीय युवक की मौत ने राज्य में एक बार फिर राजनीतिक भूचाल ला दिया है। इस घटना को लेकर DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार पर तीखा हमला बोला है और हिरासत में हो रही मौतों के 'परेशान करने वाले पैटर्न' पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, स्टालिन ने मुख्यमंत्री से पूछा है कि वे ऐसी बार-बार हो रही घटनाओं पर कब जवाब देंगे।
यह पूरा मामला थूथुकुडी जिले के अमुधा नगर निवासी अरुणाचलम की मौत से जुड़ा है। उन्हें 17 जुलाई को अवैध रूप से शराब बेचने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, उसी दिन हिरासत में उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर घर भेज दिया गया।
पूरा घटनाक्रम और परिवार के आरोप
हालत बिगड़ने पर अरुणाचलम को थूथुकुडी के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई दिनों तक चले इलाज के बावजूद बुधवार को उनकी मौत हो गई। अरुणाचलम की मौत के बाद उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की थी और उन्हीं चोटों के कारण उनकी जान गई। इन आरोपों के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
विपक्ष का हमला और पुराने वादों की याद
इस घटना की कई राजनीतिक दलों ने भी आलोचना की है। एमके स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राज्य में हिरासत में मौतों का चलन लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय को उनके विपक्ष में दिए गए बयानों की याद दिलाते हुए कहा कि तब वह तत्कालीन सरकार से जवाब मांगा करते थे और पूछते थे कि क्या सिर्फ माफी मांगना काफी है।
स्टालिन ने आरोप लगाया कि अब पद संभालने के बाद मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से माफी मांगना या सार्वजनिक सहानुभूति जताना भी जरूरी नहीं समझा। उन्होंने सवाल किया कि क्या 'जवाबदेही और माफी' जैसे शब्द अब सत्ताधारी TVK प्रशासन के लिए अप्रासंगिक हो गए हैं। इस मामले ने एक बार फिर पुलिसिंग के तरीकों पर बहस छेड़ दी है और अरुणाचलम की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
इनपुट: IANS



