कर्नाटक: मुख्यमंत्री शिवकुमार का एक महीना पूरा, पर 20 मंत्री पद अब भी खाली
कर्नाटक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने अपना एक महीना पूरा कर लिया है, लेकिन कैबिनेट का विस्तार अभी तक नहीं हो पाया है। राज्य में अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं, पर फिल
कर्नाटक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने अपना एक महीना पूरा कर लिया है, लेकिन कैबिनेट का विस्तार अभी तक नहीं हो पाया है। राज्य में अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं, पर फिलहाल केवल 13 मंत्री ही काम कर रहे हैं, जिससे 20 मंत्री पद अब भी खाली पड़े हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सत्ताधारी पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान और मंत्री पद के लिए भारी लॉबिंग को इस देरी का मुख्य कारण माना जा रहा है।
यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब कर्नाटक सूखे और कानून-व्यवस्था जैसी कई गंभीर प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। कई महत्वपूर्ण विभागों में स्थायी मंत्री न होने से कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। 3 जून को डी.के. शिवकुमार ने पूर्ववर्ती सिद्धारमैया के साथ सत्ता-साझेदारी को लेकर लंबे विवाद के बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उम्मीद थी कि इससे राज्य कांग्रेस में गुटबाजी खत्म होगी, लेकिन कैबिनेट विस्तार का मामला अब भी अधर में लटका है।
मंत्रियों पर अतिरिक्त बोझ, वरिष्ठ नेता शांत
कैबिनेट का गठन पूरा न होने से मौजूदा मंत्रियों पर काम का अतिरिक्त बोझ पड़ गया है। हालांकि, कृष्णा बायरे गौड़ा, रामलिंगा रेड्डी और के.एच. मुनियप्पा जैसे जिन वरिष्ठ नेताओं ने पहले मंत्री पद न मिलने पर नाराजगी जताई थी, वे अब शांत हैं और अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य सिद्धारमैया ने भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। एकता का संदेश देने के लिए, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कार्यकाल का एक महीना पूरा होने पर सिद्धारमैया से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की।
विवाद और बड़े नीतिगत फैसले
अपने पहले महीने में सरकार को कई राजनीतिक और प्रशासनिक विवादों का सामना करना पड़ा है। इनमें प्रियांक खड़गे की आरएसएस पर टिप्पणी, मतदाता सूची पुनरीक्षण में हस्तक्षेप के आरोप और बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के साथ टकराव शामिल हैं। इन विवादों के बीच, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कई बड़े नीतिगत फैसले भी लिए हैं। इनमें छात्रों के लिए मुफ्त बस पास, 'भारत जोड़ो यूथ एसोसिएशन' का गठन, 2,500 वर्ग फुट तक के नए घरों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट से छूट और 72,000 सरकारी पदों को छह महीने में भरने जैसी घोषणाएं शामिल हैं।
विपक्ष के आरोप और पार्टी की दुविधा
विपक्ष ने कैबिनेट विस्तार में देरी को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जानते हैं कि विस्तार होते ही उनकी सरकार की नींव हिल जाएगी, इसलिए वह जानबूझकर इसे टाल रहे हैं। वहीं, कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व भी इस मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाहता, क्योंकि उसे डर है कि कुछ नेताओं को मंत्री बनाने और कुछ को बाहर रखने से पार्टी में असंतोष बढ़ सकता है।
इनपुट: IANS



